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Politics : महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस का पलटवार, भाजपा पर ‘जानबूझकर देरी’ का आरोप

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: April 21, 2026 • 11:14 AM
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हैदराबाद डीसीसी अध्यक्ष बोले भ्रामक प्रचार कर रही है भाजपा

हैदराबाद। महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस और भाजपा (BJP) के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। हैदराबाद जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) के अध्यक्ष सैयद खालिद सैफुल्ला ने सोमवार को भाजपा पर “झूठा प्रचार” करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं के सशक्तिकरण के पक्ष में रही है और इस दिशा में अहम भूमिका निभाई है। गांधी भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में बहादुरपुरा के राजेश कुमार पुलिपाटी, चंद्रायनगुट्टा के बी. नागेश, चारमीनार के मोहम्मद मुजीबुल्ला शरीफ, मल्कपेट के शेख अकबर और याकूतपुरा के के. रवि राज सहित कई विधानसभा प्रभारी मौजूद थे। इस दौरान खालिद सैफुल्ला ने कहा कि महिला आरक्षण बिल सितंबर 2023 में कांग्रेस और सहयोगी दलों के समर्थन से पारित हुआ, लेकिन भाजपा ने इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़कर जानबूझकर लागू करने में देरी की है।

जनता को गुमराह करने की कोशिश

उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार की मंशा सही होती, तो 2024 के आम चुनाव से पहले ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया जाता। वर्तमान में परिसीमन प्रक्रिया को महिला आरक्षण के नाम पर प्रस्तुत करना जनता को गुमराह करने की कोशिश है। परिसीमन को लेकर चिंता जताते हुए डीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम होने का खतरा है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों को नुकसान हो सकता है, जबकि उत्तर भारत के राज्यों को असमान लाभ मिलेगा। कांग्रेस की नीति स्पष्ट बताते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की समर्थक रही है। उन्होंने इसे केवल नीति नहीं, बल्कि समानता, न्याय और सशक्तिकरण से जुड़ा मुद्दा बताया।

क्या उनके पास इस स्तर की कोई महिला नेता रही है

कांग्रेस के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए सैफुल्ला ने कहा कि देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल सहित कई महिला मुख्यमंत्री, राज्यपाल और मेयर कांग्रेस से ही रहे हैं। उन्होंने एनी बेसेंट, सरोजिनी नायडू और नेली सेनगुप्ता जैसे नेताओं का भी जिक्र करते हुए भाजपा से सवाल किया कि क्या उनके पास इस स्तर की कोई महिला नेता रही है। उन्होंने कहा कि 73वें और 74वें संविधान संशोधन के जरिए स्थानीय निकायों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण कांग्रेस सरकार ने लागू किया था। इसके अलावा मातृत्व लाभ, घरेलू हिंसा और कार्यस्थल पर सुरक्षा से जुड़े कानून भी कांग्रेस ने बनाए। भाजपा पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में न्याय दिलाने में केंद्र सरकार विफल रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को दोष देने के बजाय भाजपा को न्याय सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए।

महिला आरक्षण बिल क्या है?

संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को प्रतिनिधित्व बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया प्रावधान महिला आरक्षण बिल कहलाता है। इसके तहत कुल सीटों में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की व्यवस्था की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका को मजबूत करना है, जिससे लैंगिक समानता को बढ़ावा मिल सके।

128वां संविधान संशोधन विधेयक क्या है?

महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण देने के लिए प्रस्तुत 128वां संविधान संशोधन विधेयक एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रस्ताव है। इसे “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के नाम से भी जाना जाता है। इसके माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जाता है।

भारत में महिलाओं को कितना आरक्षण है?

वर्तमान समय में भारत में स्थानीय निकायों जैसे पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को कम से कम 33% आरक्षण दिया गया है, जिसे कई राज्यों में बढ़ाकर 50% तक कर दिया गया है। संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण का प्रावधान नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत किया गया है, लेकिन इसका पूर्ण क्रियान्वयन जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा।

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