Sangareddy : महात्मा बसवेश्वर जयंती धूमधाम से मनाई गई

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महात्मा बसवेश्वर जयंती
महात्मा बसवेश्वर जयंती
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टीजीआईआईसी चेयरपर्सन निर्मला जग्गा रेड्डी ने अर्पित की श्रद्धांजलि

हैदराबाद। महात्मा बसवेश्वर जयंती के अवसर पर संगारेड्डी (Sangareddy) में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस मौके पर टीजीआईआईसी चेयरपर्सन निर्मला जग्गा रेड्डी ने शहर में स्थापित बसवेश्वर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की शुरुआत संगारेड्डी नगर के बिजली कार्यालय परिसर स्थित बसवेश्वर प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई, जहां विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने भी भाग लिया। इसके बाद बाईपास रोड स्थित बसवेश्वर प्रतिमा पर भी निर्मला जग्गा रेड्डी ने पुष्पांजलि (Pushpanjali) अर्पित की।

श्रम की महत्ता को रखा समाज के सामने

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “कायकमे कैलासम” का संदेश देने वाले महात्मा बसवेश्वर ने श्रम की महत्ता को समाज के सामने रखा। उन्होंने कहा कि बसवेश्वर एक महान समाज सुधारक थे, जिन्होंने सामाजिक असमानता और जाति भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया। कार्यक्रम में संगारेड्डी नगर पालिका की चेयरपर्सन कूना वनिता संतोष, टीपीसीसी के महासचिव तोपाजी अनंत किशन, नेता कूना संतोष, पार्षद वंशी, हरीश सहित अन्य जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

2026 में बसवेश्वर महाराज जयंती कब है?

साल 2026 में बसवेश्वर जयंती 30 अप्रैल को मनाई जाएगी। यह तिथि हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया (अक्षय तृतीया) के दिन आती है। इस दिन कर्नाटक सहित कई राज्यों में विशेष कार्यक्रम, पूजा-अर्चना और शोभायात्राएं आयोजित की जाती हैं, जिनमें संत बसवेश्वर के विचारों को याद किया जाता है।

बसवा जयंती 2026 किस तारीख को है?

वर्ष 2026 में बसवा जयंती 30 अप्रैल, गुरुवार के दिन मनाई जाएगी। यह पर्व भगवान बसवेश्वर की जयंती के रूप में मनाया जाता है और खासतौर पर लिंगायत समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर श्रद्धालु मंदिरों में जाकर पूजा करते हैं और उनके सामाजिक एवं धार्मिक संदेशों को स्मरण करते हैं।

बसवेश्वर का जीवन परिचय क्या है?

बसवेश्वर 12वीं सदी के महान संत, समाज सुधारक और दार्शनिक थे, जिनका जन्म कर्नाटक के बागेवाड़ी में हुआ था। उन्होंने जाति प्रथा, अंधविश्वास और सामाजिक भेदभाव का विरोध किया और समानता, श्रम तथा भक्ति पर आधारित “वचन” साहित्य को बढ़ावा दिया। वे कल्याणी के चालुक्य राजा के दरबार में मंत्री भी रहे और लिंगायत धर्म के प्रमुख प्रवर्तक माने जाते हैं, जिनके विचार आज भी समाज को प्रेरित करते हैं।

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Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

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