Hyderabad News : केंद्र सरकार की बीआरएस ने की आलोचना, ऑपरेशन कगार को रोकने की मांग की

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सभी नागरिकों की मौतों की स्वतंत्र न्यायिक जांच की बीआरएस ने की मांग

हैदराबाद। बीआरएस ने ऑपरेशन कगार को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर आदिवासियों को विस्थापित करने और उनकी जमीनें कॉरपोरेट संस्थाओं को सौंपने के उद्देश्य से चलाया जा रहा गुप्त अभियान बताया है। पार्टी ने इस अभियान को तत्काल निलंबित करने और इस दौरान हुई सभी नागरिकों की मौतों की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। इंदिरा पार्क में आयोजित विशाल महाधरना में भाग लेते हुए बीआरएस एमएलसी दासोजू श्रवण कुमार ने इस कार्रवाई को पूर्वनियोजित कॉर्पोरेट आक्रमण बताया तथा इसे तत्काल रोकने पर जोर दिया।

लोकतांत्रिक असहमति को दबाने का आरोप

उन्होंने कहा, ‘यह कोई सुरक्षा उपाय नहीं है, बल्कि इसकी आड़ में भूमि हड़पना है।’ उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार का सैन्यीकृत दृष्टिकोण जनजातीय क्षेत्रों में संकट को और बढ़ाएगा। उन्होंने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करने और लोकतांत्रिक असहमति को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘यह तालिबान का शासन नहीं है। भारत एक ऐसा लोकतंत्र है जो बातचीत पर आधारित है, न कि गोलीबारी पर।’ उन्होंने आगे कहा कि गोलियां कभी भी नीतिगत सुधार या सामाजिक-आर्थिक न्याय की जगह नहीं ले सकतीं।

बीआरएस ने दोहराई आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा की मांग

इस मुद्दे पर बीआरएस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के रुख को रेखांकित करते हुए श्रवण ने भूमि, जंगल और आजीविका पर आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा की मांग दोहराई। उन्होंने पांचवीं अनुसूची का सख्ती से पालन करने और आदिवासी क्षेत्रों में कोई भी कार्रवाई करने से पहले ग्राम सभाओं से सहमति प्राप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने माओवादी मुद्दे के शांतिपूर्ण और संवैधानिक समाधान पर पहुंचने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर वार्ता की आवश्यकता पर बल दिया।

आदिवासियों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी बीआरएस

बीआरएस नेता ने असमानता और हाशिए पर धकेले जाने के मुद्दों पर केंद्र की चुप्पी की भी आलोचना की। उन्होंने भाजपा सरकार को आवाज़ दबाने और संवैधानिक मूल्यों को कमज़ोर करने के खिलाफ़ चेतावनी दी, साथ ही आगाह किया कि ऐसी कार्रवाइयों से व्यापक जन प्रतिरोध हो सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बीआरएस आदिवासियों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने की रक्षा करेगी।

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लेखक परिचय

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