आगामी नगर निकाय व निगम चुनावों के लिए भाजपा ने फूंका चुनावी बिगुल
हैदराबाद। तेलंगाना में आगामी नगरपालिका और नगर निगम चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनावी बिगुल फूंक दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने शनिवार को घोषणा की कि पार्टी राज्य के 10 नगर निगमों और 121 नगरपालिकाओं में पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। सिकंदराबाद (Secunderabad) में आयोजित ‘विजय संकल्प सम्मेलन’ नामक तैयारी बैठक को संबोधित करते हुए रामचंदर राव ने कहा कि भाजपा ने विशेषकर ग्रामीण तेलंगाना में जमीनी स्तर पर अभूतपूर्व विस्तार किया है।
बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता रहे उपस्थित
सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक, वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे। स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी के हालिया प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने लगभग 1,000 सरपंच पद, 1,200 से 1,500 उप-सरपंच पद और करीब 10,000 वार्ड सदस्य पद जीते हैं, जबकि पहले यह संख्या मात्र 150 सरपंच सीटों तक सीमित थी। उन्होंने दावा किया कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा के बढ़ते जनाधार को दर्शाता है। प्रतिद्वंद्वी दलों पर निशाना साधते हुए राव ने आरोप लगाया कि बीआरएस जनता की नजरों से ओझल हो चुकी है और विभाजन की ओर बढ़ रही है, जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत का श्रेय झूठे तौर पर खुद ले रही है।
शासन की उपेक्षा करने का आरोप
उन्होंने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर शासन की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार न तो कल्याणकारी योजनाओं को लागू कर पाई है और न ही चुनावी वादों को पूरा किया है। राव ने रैतु बंधु भुगतान रोके जाने, जॉब कैलेंडर की स्थिति और महिलाओं को एक तोला सोना देने जैसे वादों के अधूरे रहने पर सवाल उठाए। कांग्रेस सरकार को ’40 प्रतिशत कमीशन सरकार’ करार देते हुए उन्होंने मंत्रियों के बीच आपसी कलह और उद्योगपतियों को डराने-धमकाने के आरोप भी लगाए। केंद्र सरकार की भूमिका को रेखांकित करते हुए रामचंदर राव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले 11 वर्षों में तेलंगाना को 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता स्वीकृत की है।
बढ़ते जनसमर्थन को दर्शाती है भाजपा की सफलता
उन्होंने काज़ीपेट कोच फैक्ट्री, रामागुंडम उर्वरक संयंत्र, एम्स बीबीनगर, सम्मक्का–सरक्का जनजातीय विश्वविद्यालय, ग्रामीण सड़कों और रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया। नगरपालिकाओं और निगमों में 52 लाख मतदाता होने का उल्लेख करते हुए राव ने कहा कि देश के अन्य हिस्सों में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की सफलता बढ़ते जनसमर्थन को दर्शाती है। इस सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी, बंडी संजय कुमार, भाजपा विधानमंडल दल के नेता अलेटी महेश्वर रेड्डी, एमएलसी एवीएन रेड्डी तथा सांसद और विधायक ईटे ला राजेंद्र, कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी, पायल शंकर वेंकट रमण रेड्डी सहित अनेक वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
नगर निकाय का क्या अर्थ है?
शहरी क्षेत्रों के स्थानीय स्वशासन संस्थानों को यह नाम दिया जाता है। इसके अंतर्गत नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत आते हैं, जो शहरों में सफाई, सड़क, जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट, कर वसूली और नागरिक सुविधाओं के प्रबंधन का कार्य करते हैं।
नगरीय निकाय कब लागू हुआ था?
संवैधानिक रूप से इसे 74वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से मान्यता मिली। यह संशोधन वर्ष 1992 में पारित हुआ और 1993 से पूरे देश में प्रभावी हुआ, जिससे शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ।
नगर निकाय में कितने विषय हैं?
संविधान की 12वीं अनुसूची में कुल 18 विषय शामिल किए गए हैं। इनमें शहरी नियोजन, भूमि उपयोग, जल आपूर्ति, सार्वजनिक स्वास्थ्य, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सड़कें, स्ट्रीट लाइट और शहरी गरीबी उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण कार्य आते हैं।
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