हैदराबाद। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के हैदराबाद शाखा कार्यालय ने बुधवार को बोवेनपल्ली स्थित प्रधान प्रशिक्षण संस्थान में कृषि एवं विपणन विभाग के अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र से संबंधित भारतीय मानकों और गुणवत्ता आश्वासन प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। रंगारेड्डी, हैदराबाद, महबूबनगर, मेडक, संगारेड्डी और मेडचल–मलकाजगिरी जिलों से लगभग 65 अधिकारियों ने भाग लिया। उद्घाटन भाषण (Opening speech) में बीआईएस हैदराबाद शाखा के निदेशक एवं प्रमुख (वैज्ञानिक-ई) पी.वी. श्रीकांत ने कृषि में गुणवत्ता, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने में भारतीय मानकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
आईएसआई चिन्हित उत्पादों की खरीद पर जोर
उन्होंने कहा कि भारतीय मानकों को अपनाने से किसानों, उपभोक्ताओं और पूरी आपूर्ति श्रृंखला को लाभ होता है। उन्होंने अधिकारियों से केवल आईएसआई चिन्हित उत्पादों का उपयोग और उनकी खरीद पर जोर देने का आग्रह किया। प्रधान प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य बी.वी. कृष्णारेड्डी ने उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और कृषि उत्पादों की बाजार पहुंच में मानकीकरण के महत्व पर जोर दिया और बीआईएस की इस पहल की सराहना की। तकनीकी सत्रों में बीआईएस के संकाय सदस्य डॉ. डी. श्रीनिवास राव ने मानकीकरण प्रक्रिया, प्रमाणन योजनाओं और कृषि इनपुट, उपकरण, भंडारण और विपणन से संबंधित भारतीय मानकों पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए इसकी सराहना की।
कृषि किसे कहते हैं?
फसल उत्पादन, पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन और संबंधित गतिविधियों को मिलाकर यह प्रक्रिया कहलाती है। भूमि, जल, बीज और श्रम के सही उपयोग से भोजन, कच्चा माल और आजीविका प्राप्त की जाती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में इसका विशेष महत्व माना जाता है।
कृषि के पिता कौन थे?
आधुनिक कृषि का जनक भारत में डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन को माना जाता है। हरित क्रांति के माध्यम से उन्होंने उन्नत बीज, तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों को बढ़ावा दिया। उनके प्रयासों से खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा और देश को खाद्य सुरक्षा मिली।
1 एकड़ से किसान कितना कमाते हैं?
आय फसल, मौसम, सिंचाई, लागत और बाजार भाव पर निर्भर करती है। सामान्यतः अनाज में कम और सब्जी-फल या नकदी फसलों में अधिक कमाई होती है। औसतन एक एकड़ से सालाना लगभग 30 हजार से 2 लाख रुपये तक आय संभव मानी जाती है।
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