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Hyderabad : सरपंच संघ की जॉइंट एक्शन कमेटी का ‘चलो विधानसभा’ कार्यक्रम आयोजित

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: March 31, 2026 • 6:49 AM
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हैदराबाद। तेलंगाना राज्य सरपंचों के संघ की जॉइंट एक्शन कमेटी (Committee) द्वारा ‘चलो विधानसभा’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा 15वें वित्त आयोग के तहत जारी निधियों को तुरंत ग्राम पंचायतों को जारी करने की मांग की गई। प्रदर्शन के दौरान सरपंचों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इन निधियों को डायवर्ट कर रही है, जिससे गांवों के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। साथ ही, पूर्व सरपंचों के लंबित बिलों का तत्काल भुगतान करने की भी मांग उठाई गई। इस संबंध में प्रतिनिधिमंडल (Delegation) ने एन. रामचंदर राव से मुलाकात कर अपनी समस्याएं और मांगें रखीं।

बेहद खराब थी सरपंचों की स्थिति

इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए एन. रामचंदर राव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी पहले से ही यह आरोप लगाती रही है कि केंद्र द्वारा जारी 15वें वित्त आयोग की निधियों को राज्य सरकार द्वारा सही तरीके से ग्राम पंचायतों तक नहीं पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले भारत राष्ट्र समिति सरकार के दौरान भी सरपंचों की स्थिति बेहद खराब थी, जहां फंड की कमी के कारण कई सरपंचों पर आर्थिक दबाव बढ़ा और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आईं। रामचंदर राव ने आरोप लगाया कि उस समय विपक्ष में रही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और विशेष रूप से रेवंत रेड्डी ने सरपंचों को न्याय दिलाने और लंबित बिलों के भुगतान का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद भी ये वादे पूरे नहीं किए गए।

अब तक ग्राम पंचायतों को नहीं मिली राशि

उन्होंने बताया कि करीब 640 करोड़ रुपये की राशि, जो केंद्र सरकार ने 15वें वित्त आयोग के तहत जारी की है, अब तक ग्राम पंचायतों को नहीं मिली है। इसके कारण गांवों में विकास कार्य ठप हो गए हैं, कर्मचारियों और सफाई कर्मियों को वेतन देना भी मुश्किल हो गया है। अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से मांग की कि केंद्र से प्राप्त निधियों को बिना देरी ग्राम पंचायतों को जारी किया जाए और सरपंचों के बकाया बिलों का तुरंत भुगतान किया जाए। साथ ही, उन्होंने सरपंचों के आंदोलन को भाजपा की ओर से पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की।

गांव के सरपंच की 1 महीने की सैलरी कितनी होती है?

सरपंच की मासिक आय राज्य के नियमों पर निर्भर करती है, इसलिए पूरे देश में एक समान सैलरी नहीं होती। सामान्यतः उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सरपंच (प्रधान) को ₹3,000 से ₹5,000 तक मानदेय मिलता है, साथ ही बैठकों और योजनाओं के लिए भत्ते भी दिए जाते हैं। कुछ राज्यों में यह राशि अधिक या कम हो सकती है। इसके अलावा सरकारी योजनाओं के संचालन में जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होती है।

सरपंच को कौन सस्पेंड कर सकता है?

निलंबित करने का अधिकार जिला प्रशासन के पास होता है। आमतौर पर जिला मजिस्ट्रेट (DM) या जिला पंचायत राज अधिकारी जांच के आधार पर यह कार्रवाई कर सकते हैं। यदि सरपंच पर भ्रष्टाचार, कर्तव्य में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के आरोप साबित होते हैं, तो पहले जांच होती है और फिर निलंबन या पद से हटाने का निर्णय लिया जाता है।

ग्राम पंचायत में सबसे ऊंचा पद कौन सा है?

ग्राम पंचायत में सबसे उच्च पद सरपंच (या प्रधान) का होता है। यह व्यक्ति ग्राम पंचायत का निर्वाचित प्रमुख होता है और गांव के विकास कार्यों, योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक निर्णयों की जिम्मेदारी संभालता है। पंचायत के अन्य सदस्य सरपंच के साथ मिलकर कार्य करते हैं, लेकिन अंतिम नेतृत्व और निर्णय लेने की मुख्य भूमिका उसी के पास होती है।

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