हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (Chief Minister A. Revanth Reddy) ने रंगों के त्योहार होली के अवसर पर तेलंगानावासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री ने सोमवार को जारी संदेश में कहा कि वह आशा करते हैं कि लोग होली को उत्साह और आनंद के साथ मनाएंगे। उन्होंने बताया कि होली प्रेम, स्नेह, खुशी का त्योहार है और यह शांति व भाईचारे का प्रतीक भी है। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे प्राकृतिक रंगों का उपयोग करते हुए पारंपरिक तरीके से त्योहार मनाएं। रेवंत रेड्डी (Revanth Reddy) ने कहा कि होली जाति और धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर लोगों में एकता का प्रतीक भी है।
होली की पूर्णिमा कब है?
यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा 3 मार्च की रात से प्रारंभ होकर 4 मार्च तक रहेगी (तिथि का समय पंचांग के अनुसार बदल सकता है)। इसी दिन होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है। अलग-अलग शहरों में तिथि का सूक्ष्म अंतर स्थानीय पंचांग पर निर्भर करता है।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त कब है?
दहन का शुभ समय पूर्णिमा की रात में भद्रा काल समाप्त होने के बाद माना जाता है। वर्ष 2026 में भद्रा का समापन रात में होने के बाद ही दहन करना शुभ रहेगा। सामान्यतः यह अनुष्ठान सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में किया जाता है। सही समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग या मंदिर की घोषणा देखना उपयुक्त रहता है, क्योंकि स्थानानुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है।
होलिका क्यों मनाई जाती है?
यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने हस्तक्षेप किया और हिरण्यकश्यप की बहन होलिका अग्नि में भस्म हो गई। इस घटना की स्मृति में होलिका दहन किया जाता है, जो संदेश देता है कि सत्य और भक्ति की हमेशा जीत होती है।
होली का क्या अर्थ है?
यह रंगों, प्रेम और आपसी भाईचारे का उत्सव है। “होली” शब्द को “होलिका” से जुड़ा माना जाता है। इस दिन लोग पुराने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और खुशी बांटते हैं। यह सामाजिक मेलजोल, सौहार्द और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, जो वसंत ऋतु के आगमन की खुशी भी व्यक्त करता है।
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