विभिन्न शहरों में अलग-अलग बैक्टीरिया प्रचलित
हैदराबाद। एंटीमाइक्रोबियल दवाएँ जैसे एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया को मारती हैं और कई घातक बैक्टीरियल बीमारियों से बचाती हैं। लेकिन अब बैक्टीरिया एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हो रहे हैं, जिससे ये दवाएँ पहले जैसी प्रभावी नहीं रही। इस स्थिति को एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) कहा जाता है, जो हर साल दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत का कारण बनती है। भारत में स्थानीय स्तर पर एएमआर का डेटा अभी तक काफी हद तक उपलब्ध नहीं है।
हमें यह नहीं पता कि हमारे आसपास कौन से घातक बैक्टीरिया सबसे ज्यादा प्रतिरोधी हैं और क्या ये सभी समान तरीके अपनाकर प्रतिरोधी बनते हैं। पारंपरिक लैब कल्चर विधियाँ इस तरह का विवरण नहीं देतीं। सीएसआईआर -सेलुलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी (CCMB) और साझेदार संस्थानों के शोधकर्ताओं ने नेचर कम्युनिकेशन्स में एक महत्वपूर्ण अध्ययन प्रकाशित किया है, जो भारतीय शहरी अपशिष्ट जल में एएमआर का पहला व्यापक मानचित्र प्रस्तुत करता है।
447 नमूनों का विश्लेषण कर किया गया अध्ययन
शोधकर्ताओं ने शॉटगन मेटाजेनॉमिक्स दृष्टिकोण अपनाया, जिससे बैक्टीरिया के जीनों का विश्लेषण किया जा सके। इन जीनों के माध्यम से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि बैक्टीरिया कैसे प्रतिरोध विकसित करते हैं। अध्ययन मार्च 2022 से मार्च 2024 तक दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के 19 स्थानों से 447 नमूनों का विश्लेषण कर किया गया। परिणामों से पता चला कि विभिन्न शहरों में अलग-अलग बैक्टीरिया प्रचलित हैं, लेकिन वे एंटीबायोटिक्स के प्रतिरोध के समान तरीके अपनाते हैं। बैक्टीरिया कुछ विशेष जीनों के कारण एंटीबायोटिक्स के प्रतिरोधी बनते हैं।
ये जीन बैक्टीरिया की कोशिका दीवार को मजबूत बनाते हैं जिससे दवा प्रवेश न कर सके, या दवा को बाहर निकालने या उसे नष्ट करने में मदद करते हैं। ये जीन बैक्टीरिया न केवल अपनी संतानों के साथ बल्कि अपने पड़ोसियों के साथ भी साझा कर सकते हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि स्थानीय पर्यावरणीय कारकों के आधार पर माइक्रोबियल समुदाय बदलते हैं।
चेन्नई और मुंबई में ज़्यादा फैलता है क्लेबसिएला न्यूमोनिया
उदाहरण के लिए, क्लेबसिएला न्यूमोनिया चेन्नई और मुंबई में ज़्यादा फैलता है, जबकि स्यूडोमोनास एरुगिनोसा कोलकाता में अधिक पाया गया। लेकिन एंटीबायोटिक प्रतिरोध के लिए जिम्मेदार जीन सभी चार महानगरों में समान रहे। एंटीबायोटिक्स अलग-अलग रासायनिक वर्गों जैसे टेट्रासाइक्लिन, बीटा-लैक्टम्स और मैक्रोलाइड्स में आते हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि बैक्टीरिया टेट्रासाइक्लिन और बीटा-लैक्टम्स के खिलाफ प्रतिरोधी जीन साझा करने में मैक्रोलाइड्स की तुलना में कहीं अधिक सक्षम हैं।
खतरों की पहचान के अलावा, शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि देश में वेस्टवाटर आधारित पैथोजन सर्विलांस को अधिक व्यापक रूप से अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक व्यावहारिक मार्ग भी प्रस्तुत किया है। डॉ. विनय के. नंदीकोरी, निदेशक, सीएसआईआर-सीसीएमबी ने कहा, ”हमने एक मानक संचालन प्रक्रिया विकसित और मान्य की है, जिससे नमूनों को 4°C पर सात दिनों तक प्रभावी ढंग से संग्रहित किया जा सकता है, बिना डेटा की गुणवत्ता को प्रभावित किए। नमूनों को सामान्य परीक्षण हब में भेजा जा सकता है, जो संसाधन-सीमित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है। वेस्टवाटर सर्विलांस में व्यापक भागीदारी प्रारंभिक महामारी का पता लगाने और प्रतिरोधी पैथोजन के फैलाव को वास्तविक समय में ट्रैक करने में मदद करेगी।”
बैक्टीरिया क्या होता है?
यह सूक्ष्म जीव होते हैं, जिन्हें नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता। ये एककोशिकीय जीव होते हैं और लगभग हर जगह पाए जाते हैं—हवा, पानी, मिट्टी और मानव शरीर में भी। कुछ बैक्टीरिया हमारे लिए फायदेमंद होते हैं, जैसे पाचन में मदद करने वाले, जबकि कुछ हानिकारक होते हैं और बीमारियां पैदा कर सकते हैं।
कौन सा रोग बैक्टीरिया से होता है?
कई बीमारियां बैक्टीरिया के कारण होती हैं, जैसे Tuberculosis (टीबी), Typhoid (टाइफाइड) और Cholera (हैजा)। ये रोग संक्रमित पानी, भोजन या हवा के जरिए फैल सकते हैं। सही इलाज और स्वच्छता अपनाने से इनसे बचाव संभव है।
शरीर में बैक्टीरिया होने के क्या लक्षण हैं?
संक्रमण होने पर बुखार, कमजोरी, थकान, उल्टी, दस्त, दर्द या सूजन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अलग-अलग बैक्टीरिया के अनुसार लक्षण भी बदलते हैं। कुछ मामलों में त्वचा पर संक्रमण, खांसी या सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जांच और सही इलाज कराना जरूरी होता है।
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