बढ़ सकती है महंगाई, ऐतिहासिक गिरावट और वर्तमान स्थिति
नई दिल्ली: आज 12 मई 2026 को भारतीय रुपया(Rupee) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे गिरकर ₹95.50 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का वह बयान है जिसमें उन्होंने ईरान के साथ संघर्ष विराम (Ceasefire) को कमजोर बताया है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं, जिसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा है।
रुपया कमजोर होने के प्रमुख कारण
रुपए में इस बड़ी गिरावट के पीछे कई वैश्विक और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव की वजह से निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर भाग रहे हैं। भारत अपनी तेल की जरूरतों का 80% आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल का महंगा होना भारत के ‘करेंट अकाउंट डेफिसिट’ (CAD) को बढ़ा रहा है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक अनिश्चितता के कारण डॉलर की मांग बढ़ गई है और विदेशी निवेशक शेयर बाजार से लगातार अपनी निकासी कर रहे हैं।
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आम जनता और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से भारत में महंगाई बढ़ने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। चूंकि तेल और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों का आयात महंगा हो जाएगा, इसलिए पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। इसका असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ेगा। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स (जैसे मोबाइल, लैपटॉप) महंगे होंगे और विदेश में पढ़ाई या घूमना अब पहले के मुकाबले काफी महंगा हो जाएगा क्योंकि अब हर डॉलर के लिए भारतीयों को ज्यादा रुपए चुकाने होंगे।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का भारतीय रुपए पर क्या असर पड़ता है?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है जिसका भुगतान डॉलर में होता है। तेल महंगा होने पर भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे बाजार में डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर हो जाता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान से भारतीय करेंसी का क्या संबंध है?
अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान वैश्विक अस्थिरता (Geopolitical Tension) पैदा करता है। जब युद्ध की आशंका बढ़ती है, तो निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर डॉलर जैसी सुरक्षित संपत्ति में निवेश करते हैं, जिससे रुपए की वैल्यू गिर जाती है।
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