हैदराबाद। शनि जयंती (Shani Jayanti) के पावन अवसर पर, एई फाउंडेशन और नारी-शक्ति राम-सेविका समूह की लगभग 40 महिला स्वयंसेवकों ने मिलकर वैदेही सेवा समिति, एक महिला विशेष अनाथालय में सामूहिक अन्नदान कार्यक्रम का आयोजन किया। इस सेवा पहल के अंतर्गत संस्थान में आश्रय प्राप्त लगभग 60 वंचित बालिकाओं के लिए भोजन, राशन सामग्री, सेनेटरी नैपकिन तथा आर्थिक सहायता प्रदान की गई। कार्यक्रम में महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी (Active Participation) निभाते हुए बालिकाओं को न केवल भौतिक सहायता दी, बल्कि उन्हें आत्मीयता, भावनात्मक सहयोग और प्रोत्साहन भी प्रदान किया।
अन्नदान केवल भोजन प्रदान करने की प्रक्रिया नहीं

आयोजकों ने कहा कि अन्नदान केवल भोजन प्रदान करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव, करुणा और समानता को मजबूत करने वाली एक पवित्र सांस्कृतिक परंपरा है। इस प्रकार की सामूहिक सेवा गतिविधियाँ बच्चों में संवेदनशीलता और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करती हैं। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि अमावस्या, शनिवार और शनि जयंती का संयोग विनम्रता, सेवा और अहंकार त्याग का संदेश देता है। “भूखे को भोजन कराना ही सच्ची आस्था है,” इस भाव ने पूरे आयोजन की भावना को दर्शाया। कार्यक्रम के दौरान “जय श्री राम” के जयकारों के बीच यह आयोजन संपन्न हुआ। एई फाउंडेशन और नारी-शक्ति राम-सेविका समूह ने यह संदेश दिया कि समाज में नारी शक्ति की वास्तविक भूमिका सेवा, करुणा और संवेदनशीलता के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाने में निहित है।
शनि जयंती के दिन क्या करें?
इस दिन Shani Dev की पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। कई लोग पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाते हैं और जरूरतमंदों को काले वस्त्र, तिल या भोजन दान करते हैं। शनिदेव मंदिर में जाकर तेल अर्पित करने की भी परंपरा मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार संयम, सत्य और अच्छे कर्मों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पूजा के दौरान शनि मंत्र और हनुमान चालीसा का पाठ भी किया जाता है।
शनि जयंती कब है?
यह पर्व ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इसी दिन Shani Dev के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में तिथि और पूजा का समय पंचांग के अनुसार थोड़ा बदल सकता है। इस दिन विशेष पूजा, व्रत और दान का महत्व बताया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव न्याय और कर्मफल के देवता माने जाते हैं।
शनि जयंती पर शनि देव को क्या चढ़ाएं?
पूजा में सरसों का तेल, काला तिल, काली उड़द और नीले या काले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। कई भक्त लोहे से बनी वस्तुएं और काले वस्त्र भी दान करते हैं। Shani Dev को तेल चढ़ाने की परंपरा काफी प्रसिद्ध मानी जाती है। पीपल के पेड़ की पूजा और दीपक जलाना भी धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने पर सकारात्मक फल मिलने की मान्यता है।
2026 में शनिदेव जयंती कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में शनि जयंती 15 मई को मनाई जाएगी। इस दिन देशभर के शनिदेव मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भक्त व्रत रखते हैं और दान-पुण्य करते हैं। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में इस पर्व को विशेष महत्व दिया जाता है। पूजा का सही मुहूर्त और विधि जानने के लिए पंचांग या स्थानीय पुरोहित की सलाह लेना उपयोगी माना जाता है।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :