BJP : नगर निकाय चुनावों से पहले भाजपा से डरी कांग्रेस – रामचंदर राव

Read Time:  1 min
रामचंदर
रामचंदर
FONT SIZE
GET APP

भाजपा तेलंगाना स्टेट डायरी जारी की

हैदराबाद। तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव (N. Ramchander Rao) ने शनिवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ कांग्रेस ”विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार – आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025” को लेकर जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि नगर निकाय चुनावों से पहले भाजपा को मिल रहे बढ़ते जनसमर्थन से कांग्रेस घबराई हुई है। ”भाजपा तेलंगाना स्टेट डायरी” जारी करने के बाद भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए रामचंदर राव ने कहा कि नया अधिनियम मनरेगा का आधुनिक और सशक्त रूप है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण गरीबों के लिए अधिक कार्यदिवसों के साथ रोजगार के अवसरों का विस्तार करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (Chief Minister A. Revanth Reddy) जानबूझकर इस कानून का विरोध कर जनता को भ्रमित कर रहे हैं।

जनविरोधी शासन शैली को कर दिया उजागर

उन्होंने कहा, कांग्रेस और बीआरएस दोनों ने अपनी जनविरोधी शासन शैली को उजागर कर दिया है। अब दोनों मिलकर भाजपा के खिलाफ झूठा प्रचार कर रहे हैं। भाजपा नेता ने कांग्रेस सरकार पर केंद्र की मुफ्त चावल योजना का श्रेय लेने का भी आरोप लगाया, जिसके तहत प्रति लाभार्थी 5 किलो चावल दिया जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री की तस्वीर के बिना राशन चावल के वितरण पर आपत्ति जताई और मांग की कि सभी राशन बैग और रसीदों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर अनिवार्य की जाए। ऐसा न होने पर उन्होंने राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी। इससे पहले रामचंदर राव ने ”सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के अवसर पर उस्मानिया विश्वविद्यालय स्थित शिव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की।

बलिदानों की स्मृति में किया जाता है आयोजन

उन्होंने कहा कि यह आयोजन सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए दिए गए बलिदानों की स्मृति में किया जाता है, जो बार-बार हुए आक्रमणों के बावजूद भारत की आध्यात्मिक दृढ़ता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रेरणा से 1951 में सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण पूरा हुआ था। राव ने कहा कि वर्ष 2026 में महमूद गजनवी के सोमनाथ पर आक्रमण के 1,000 वर्ष पूरे होंगे, जिसे उन्होंने भारतीय सभ्यता और आस्था पर हमला बताया। इस अवसर पर भाजपा नेता वेमुला अशोक, एन.वी. सुभाष, वेंकट रेड्डी, तडूरी श्रीनिवास सहित अन्य नेता उपस्थित थे।

नगरीय निकाय कब लागू हुआ था?

भारत में शहरी स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक दर्जा 74वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से मिला। यह संशोधन वर्ष 1992 में संसद द्वारा पारित किया गया और 1 जून 1993 से पूरे देश में लागू हुआ। इसके बाद नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम जैसी संस्थाओं को स्पष्ट अधिकार, जिम्मेदारियां और संरचना प्रदान की गई।

नगरीय निकाय का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?

संविधान के प्रावधानों के अनुसार शहरी स्थानीय निकायों का कार्यकाल सामान्यतः 5 वर्ष का होता है। यदि किसी कारणवश निकाय को समय से पहले भंग कर दिया जाता है, तो 6 महीने के भीतर नए चुनाव कराना अनिवार्य होता है। यह व्यवस्था लोकतांत्रिक निरंतरता बनाए रखने के लिए की गई है।

74 वां संविधान संशोधन क्या है?

शहरी स्वशासन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से किया गया यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन है। इसके तहत नगर निकायों को संवैधानिक मान्यता, नियमित चुनाव, वित्तीय अधिकार और 18 विषयों की जिम्मेदारी दी गई। साथ ही वार्ड समितियों और राज्य वित्त आयोग की व्यवस्था भी इसी संशोधन के अंतर्गत की गई।

Read Telugu News: https://vaartha.com/

यह भी पढ़ें :

Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।