Hyderabad : ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों के भवन निर्माण में तेजी

Read Time:  1 min
स्वयं सहायता समूहों
स्वयं सहायता समूहों
FONT SIZE
GET APP

हैदराबाद। राज्य में महिलाओं को कार्य और विपणन के लिए स्थायी स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंचायत राज एवं ग्रामीण विकास विभाग ने गांवों में स्वयं सहायता समूहों (SHG) के लिए भवन निर्माण कार्यों में तेजी लाई है। यह पहल मंत्री दानसरी अनसूया सीतक्का की परिकल्पना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर महिला समूहों के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार करना है।

यह योजना ‘इंदिरा महिला शक्ति’ के तहत लागू की जा रही है, जो महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का प्रमुख माध्यम बनेगी। मंत्री सीतक्का ने कहा कि हर गांव में महिलाओं के लिए मजबूत मंच तैयार करना सरकार का लक्ष्य है। ये भवन आत्मरोजगार के अवसर बढ़ाने और सामूहिक निर्णय (collective decision) लेने में सहायक होंगे।

मुलुगु विधानसभा क्षेत्र में कई भवनों का किया शिलान्यास

यादाद्री भुवनगिरि जिले के आत्मकूर मंडल के सर्वेपल्ली गांव में एक मॉडल भवन तैयार हो चुका है, जबकि रंगारेड्डी जिले के केशमपेट मंडल के अलवाल गांव में भी एक भवन का निर्माण किया गया है। प्रत्येक भवन लगभग 200 वर्ग गज में करीब 10 लाख रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। इन भवनों का संचालन ग्राम संगठनों (वीओ) द्वारा किया जाएगा, जहां बैठकों, प्रशिक्षण, मानव संसाधन विकास और उत्पादों के प्रदर्शन एवं बिक्री की सुविधा उपलब्ध होगी।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 8,193 गांवों में भूमि चिन्हित की गई है, जिनमें से 6,261 को जिला कलेक्टरों की स्वीकृति मिल चुकी है। 5,017 भवनों के लिए अनुमान तैयार कर निर्माण कार्य तेजी से जारी है। मंत्री सीतक्का ने एसईआरपी और पंचायत राज विभाग के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। ‘प्रजा पालन–प्रगति योजना’ के 99 दिवसीय कार्यक्रम के तहत उन्होंने गुरुवार को मुलुगु विधानसभा क्षेत्र में कई भवनों का शिलान्यास भी किया।

1500 रुपये की महिला योजना क्या है?

कुछ राज्यों में महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं। उदाहरण के लिए मध्य प्रदेश की “लाड़ली बहना योजना” में राशि बढ़ाकर ₹1500 प्रति माह कर दी गई है। इस तरह की योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उनके दैनिक खर्चों में सहायता देना होता है। अलग-अलग राज्यों में इस राशि और योजना का नाम अलग हो सकता है।

महिला स्वयं सहायता क्या है?

स्वयं सहायता समूह (Self Help Group – SHG) 10–20 महिलाओं का छोटा समूह होता है, जो मिलकर बचत करते हैं और एक-दूसरे को छोटे ऋण देते हैं। ये समूह छोटे व्यवसाय, खेती, सिलाई, डेयरी आदि काम शुरू करने में मदद करते हैं। सरकार भी इन समूहों को प्रशिक्षण, लोन और आर्थिक सहायता देती है, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।

महिला समूह के सदस्य को कितना लोन मिल सकता है?

स्वयं सहायता समूह की सदस्य को अलग-अलग योजनाओं के तहत अलग राशि मिल सकती है। जैसे:

  • ₹50,000 से ₹1 लाख तक छोटा लोन
  • ₹1 लाख से ₹10 लाख तक (मुद्रा योजना)
  • समूह के जरिए ₹20 लाख तक बिना गारंटी लोन
    यह राशि बैंक, योजना और समूह की विश्वसनीयता पर निर्भर करती है।

महिलाओं के लिए अभी कौन सी योजना चल रही है?

वर्तमान में कई योजनाएं चल रही हैं, जैसे:

  • DAY-NRLM (महिला समूह योजना)
  • मुद्रा योजना (लोन के लिए)
  • लाड़ली बहना योजना (₹1500 सहायता)
  • राज्य सरकारों की पेंशन और सहायता योजनाएं
    इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार, आय और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।

Read Telugu News: https://vaartha.com/

यह भी पढ़ें :

Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।