हैदराबाद। तेलंगाना ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन (डीसीए ) ने बिना लाइसेंस मेडिकल डिवाइस के निर्माण और बिक्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई (Major Raid) करते हुए रायदुर्ग, सेरिलिंगमपल्ली स्थित ब्लूसेमी रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड पर छापा मारा। इस दौरान करीब 4 लाख मूल्य के मेडिकल डिवाइस (Medical Devices) ज़ब्त किए गए।
बिना वैध लाइसेंस बन रहा था पेशेंट मॉनिटर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन, तेलंगाना के अधिकारियों ने विश्वसनीय सूचना के आधार पर यह छापेमारी की। कार्रवाई केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से की गई। जांच में पाया गया कि कंपनी बिना वैध लाइसेंस के ‘पेशेंट मॉनिटर (EYVA – इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल डिवाइस)’ का निर्माण और बिक्री कर रही थी, जिसका उपयोग मानव शरीर के महत्वपूर्ण संकेतकों की निगरानी के लिए किया जाता है।छापे के दौरान अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में तैयार मेडिकल डिवाइस, बिक्री के लिए रखे गए स्टॉक, उपयोग पुस्तिकाएं (यूज़र मैनुअल) और बिक्री चालान बरामद कर ज़ब्त किए।
निर्माण में गुणवत्ता तथा मानकों का पालन आवश्यक : शहनवाज़ क़ासिम
महानिदेशक ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन शहनवाज़ क़ासिम, ने बताया कि जोखिम वर्ग A (स्टेराइल एवं मापने वाले) तथा वर्ग B के मेडिकल डिवाइस का निर्माण अनिवार्य रूप से फॉर्म MD-5 के अंतर्गत जारी वैध लाइसेंस के साथ ही किया जा सकता है। यह उत्पाद ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 एवं मेडिकल डिवाइसेज़ नियम, 2017 के अंतर्गत मेडिकल डिवाइस की श्रेणी में आता है, और इसके निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) तथा मानकों का पालन आवश्यक है।

ऐसे उपकरण जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा : डीसीए
यह कार्रवाई डिप्टी डायरेक्टर-II स्मत. अंजुम आबिदा और सहायक निदेशक श्री के. अनिल कुमार के पर्यवेक्षण में की गई। छापे में ड्रग्स इंस्पेक्टर स्मत. डी. श्वेता बिंदु (गंडिपेट), के. अन्वेष (शाबाद) तथा सीडीएससीओ हैदराबाद ज़ोन के एम. विक्रम शामिल थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बिना लाइसेंस मेडिकल डिवाइस का निर्माण गंभीर अपराध है, जिसके लिए पांच वर्ष तक की कैद का प्रावधान है। बिना लाइसेंस निर्मित उपकरण गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरते और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। मामले की आगे की जांच जारी है और सभी दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ड्रग कंट्रोल एक्ट क्या है?
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 भारत का एक कानून है जो दवाइयों (ड्रग्स) और कॉस्मेटिक्स (सौंदर्यवर्धक उत्पादों) के आयात, निर्माण, वितरण और बिक्री को नियंत्रित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाज़ार में बेची जाने वाली दवाइयाँ सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों। इसके अंतर्गत दवाओं के लिए लाइसेंस, मानक, परीक्षण, लेबलिंग और नियम होते हैं, और नियमों का उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान है।
ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन क्या है?
ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (Drug Control Administration) देश के राज्यों में काम करने वाली एक सरकारी नियामक प्राधिकरण है। यह विभाग ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट तथा इसके नियमों का पालन करवाने के लिए जिम्मेदार है। इसके मुख्य काम हैं:
- दवाइयाँ, मेडिकल डिवाइस और सौंदर्य उत्पादों के निर्माण और बिक्री के लिए लाइसेंस देना और नवीनीकरण करना।
- निर्माण इकाइयों, दवा दुकानों और गोदामों का निरीक्षण करना।
- बाजार में मिलने वाली दवाओं के नमूने लेकर उनकी जांच करवाना।
- अवैध, नकली या घटिया दवाओं पर कार्रवाई करना।
राज्यों में यह विभाग अलग-अलग नामों से काम कर सकता है, लेकिन उद्देश्य समान होता है — लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाइयाँ उपलब्ध कराना।
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