सरकारी मेडिकल कॉलेज का वार्षिकोत्सव आयोजित
हैदराबाद। सड़कों एवं भवन तथा सिनेमाटोग्राफी मंत्री कोमटिरेड्डी वेंकट रेड्डी (Komatireddy Venkat Reddy) ने कहा कि चिकित्सा सबसे श्रेष्ठ पेशा है और डॉक्टरों को सफेद कोट की गरिमा के अनुरूप करुणा एवं समर्पण के साथ गरीबों की सेवा करनी चाहिए। वे नलगोंडा के सरकारी मेडिकल कॉलेज के वार्षिकोत्सव ‘अद्वितीय–2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मेडिकल छात्रों को शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ मानवीय मूल्यों को भी आत्मसात करना चाहिए। मंत्री ने कॉलेज की समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन (Assurance) देते हुए छात्रों के लिए दो वातानुकूलित बसों की स्वीकृति की घोषणा की, जिन्हें एक माह के भीतर उपलब्ध कराया जाएगा।
छात्रों को शोध अनुभव के लिए अवसर देने पर सहमति
उन्होंने बताया कि डॉ. नागेश्वर रेड्डी (एआईजी हॉस्पिटल्स) ने हर वर्ष 45 स्नातकोत्तर छात्रों को शोध अनुभव के लिए अपने संस्थान में अवसर देने पर सहमति जताई है और इस संबंध में शीघ्र ही एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे। मंत्री ने नलगोंडा में 900 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन आउटर रिंग रोड परियोजना का उल्लेख करते हुए शहर को स्मार्ट एवं मॉडल सिटी के रूप में विकसित करने का संकल्प दोहराया।
सिनेमाटोग्राफी क्या है?
फिल्म या वीडियो में दृश्य को कैमरे के माध्यम से कलात्मक और तकनीकी तरीके से प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को सिनेमाटोग्राफी कहा जाता है। इसमें लाइटिंग, कैमरा एंगल, फ्रेमिंग, मूवमेंट और रंगों का संतुलन शामिल होता है। इसका उद्देश्य कहानी को प्रभावशाली दृश्य रूप देना और भावनाओं को दर्शकों तक पहुंचाना होता है। यह फिल्म निर्माण की एक महत्वपूर्ण कला और तकनीक है।
सिनेमैटोग्राफर क्या होता है?
फिल्म या वीडियो के दृश्य पक्ष का प्रमुख जिम्मेदार व्यक्ति सिनेमैटोग्राफर कहलाता है। वही कैमरे की सेटिंग, लाइटिंग डिजाइन, शॉट कंपोज़िशन और मूवमेंट तय करता है। निर्देशक की कल्पना को दृश्य रूप देने में उसकी अहम भूमिका होती है। बड़े प्रोजेक्ट्स में उसे डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी (DOP) भी कहा जाता है।
सिनेमैटोग्राफी के 5 सी क्या हैं?
इस क्षेत्र में अक्सर “5 C’s” का उल्लेख किया जाता है, जिनमें Camera Angles (कैमरा एंगल), Continuity (सततता), Cutting (एडिटिंग), Close-ups (क्लोज-अप शॉट) और Composition (संरचना) शामिल हैं। ये तत्व मिलकर किसी भी दृश्य को आकर्षक, स्पष्ट और भावनात्मक रूप से प्रभावी बनाते हैं। इनका सही संतुलन ही अच्छी फिल्म निर्माण की पहचान है।
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