हैदराबाद। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को सरल ई-गवर्नेंस (E-Governance) के माध्यम से जनता को अधिक प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयास करने चाहिए। यह निर्देश केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिव डॉ. टीवी सोमनाथन ने विभिन्न राज्यों के मुख्य सचिवों को दिए। सोमवार को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस (Video Conference) में कैबिनेट सचिव ने कहा कि तमिलनाडु सरकार द्वारा अपनाई जा रही “सिंपलगव” ई-गवर्नेंस प्रणाली को अन्य राज्य भी अपने-अपने नियमों के अनुसार लागू कर नागरिक सेवाओं को सरल और पारदर्शी बना सकते हैं। इस अवसर पर तेलंगाना के मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव ने राज्य में लागू ई-गवर्नेंस प्रणाली की जानकारी दी।
कैबिनेट सचिव ने विभिन्न राज्यों के मुख्य सचिवों को दिए निर्देश
उन्होंने बताया कि तेलंगाना में विभिन्न विभागों की सेवाएं ऑनलाइन डैशबोर्ड के माध्यम से पारदर्शी रूप से जनता को उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें नगर प्रशासन, उद्योग, शिक्षा, ऊर्जा और राजस्व विभाग शामिल हैं। कैबिनेट सचिव ने तेलंगाना की ई-गवर्नेंस प्रणाली की सराहना की। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि तमिलनाडु मॉडल का अध्ययन कर ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएं, जिससे जनता पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और सेवाएं अधिक सरल हो सकें। बैठक में विशेष मुख्य सचिव नवीन मित्तल, मुख्य सचिव योगिता राणा, शीखा गोयल, सचिव रघुनंदन राव, ई. श्रीधर, अनिता रामचंद्रन, हाउसिंग एमडी वी.पी. गौतम, सेर्प सीईओ दिव्या सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
ई-गवर्नेंस आप क्या समझते हैं?
सरकारी सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों को डिजिटल तकनीक के माध्यम से संचालित करने की व्यवस्था को ई-गवर्नेंस कहा जाता है। इसमें इंटरनेट, कंप्यूटर और मोबाइल तकनीक का उपयोग करके नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ऑनलाइन प्रमाण पत्र, डिजिटल भुगतान, शिकायत पोर्टल और सरकारी योजनाओं की जानकारी इसके प्रमुख भाग हैं। इसका उद्देश्य प्रशासन को तेज, पारदर्शी और आसान बनाना है। आधुनिक समय में डिजिटल इंडिया जैसी पहल के कारण ई-गवर्नेंस का उपयोग तेजी से बढ़ा है।
ई-गवर्नेंस से क्या लाभ होते हैं?
डिजिटल माध्यम से सरकारी सेवाएं मिलने के कारण लोगों का समय और खर्च दोनों बचते हैं। इससे सरकारी कार्यों में पारदर्शिता बढ़ती है और भ्रष्टाचार कम करने में मदद मिलती है। नागरिक घर बैठे ऑनलाइन आवेदन, भुगतान और शिकायत दर्ज कर सकते हैं। प्रशासनिक प्रक्रियाएं तेज होने से सेवाएं जल्दी उपलब्ध होती हैं। रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और जानकारी आसानी से प्राप्त करने में भी सुविधा मिलती है। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने में यह व्यवस्था काफी उपयोगी मानी जाती है।
ई-गवर्नेंस का उदाहरण क्या है?
ऑनलाइन आधार सेवा, डिजिटल भूमि रिकॉर्ड, ई-हॉस्पिटल और ऑनलाइन टैक्स भुगतान जैसी सेवाएं इसके प्रमुख उदाहरण हैं। कई राज्यों में जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और बिजली बिल भुगतान की सुविधाएं भी इंटरनेट के माध्यम से उपलब्ध कराई गई हैं। रेलवे टिकट बुकिंग और पासपोर्ट आवेदन जैसी सेवाएं भी ई-गवर्नेंस का हिस्सा मानी जाती हैं। इन डिजिटल व्यवस्थाओं से लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ते हैं और कार्य तेजी से पूरे होते हैं।
ई-गवर्नेंस में कुल कितने चरण होते हैं?
डिजिटल प्रशासन की प्रक्रिया को सामान्य रूप से चार प्रमुख चरणों में बांटा जाता है। इनमें सूचना उपलब्ध कराना, दो-तरफा संवाद, ऑनलाइन लेनदेन और पूर्ण डिजिटल एकीकरण शामिल हैं। पहले चरण में जानकारी दी जाती है, दूसरे में नागरिक संवाद कर सकते हैं। तीसरे चरण में आवेदन और भुगतान जैसी सेवाएं ऑनलाइन होती हैं, जबकि अंतिम चरण में सभी विभाग एकीकृत डिजिटल प्रणाली से जुड़े रहते हैं। इन चरणों का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक सरल और प्रभावी बनाना है।
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