हैदराबाद। शहर के पुलिस कमिश्नर वी.सी. सज्जनार (V.C. Sajjanar) ने कहा कि तेलंगाना पुलिस ट्रांसजेंडर समुदाय के सामने आने वाली समस्याओं के समाधान पर विशेष ध्यान दे रही है। अंतरराष्ट्रीय ट्रांसजेंडर विजिबिलिटी डे–2026 के अवसर पर, कमिश्नर ने अबिड् स्थित एक हाई स्कूल में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लिया। यह कार्यक्रम क्वीर बंधु पेरेंट्स एसोसिएशन, मोंटफोर्ट सोशल इंस्टीट्यूट, वासावी किन्नर वेलफेयर सोसाइटी और प्रज्वला (Prajwala) के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान कमिश्नर सज्जनार ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय समाज का एक सक्रिय हिस्सा है, जो अपने आत्म-सम्मान के लिए संघर्ष कर रहा है।
विशेष रूप से की उनके प्रयासों की सराहना
उन्होंने उन सभी लोगों को बधाई दी, जो इस समुदाय के समर्थन में खड़े हैं और विशेष रूप से उनके प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को एक साझा मंच पर एकजुट करने का काम किया। सज्जनार ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन, जो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करते हैं, सराहनीय पहल हैं। उन्होंने दोहराया कि तेलंगाना सरकार और हैदराबाद पुलिस दोनों ही ट्रांसजेंडर समुदाय की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय में अपार प्रतिभा और कलात्मक कौशल है और माता-पिता को अपने ट्रांसजेंडर बच्चों को पहले स्वीकार करना चाहिए और उनका समर्थन करना चाहिए।
उन्होंने क्वीर बंधु पेरेंट्स एसोसिएशन के समाज में ट्रांसजेंडर के खिलाफ भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष की सराहना की। सज्जनार ने आश्वासन दिया कि पुलिस तब तक सहयोग करती रहेगी जब तक ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज में समान सम्मान नहीं मिल जाता। इस अवसर पर ट्रांसजेंडर समुदाय द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।
किन्नर और ट्रांसजेंडर में क्या अंतर होता है?
“किन्नर” शब्द भारत में पारंपरिक रूप से उस समुदाय के लिए उपयोग होता है जिसे आम भाषा में हिजड़ा भी कहा जाता है। जबकि ट्रांसजेंडर एक व्यापक पहचान है, जिसमें वे लोग आते हैं जिनकी जेंडर पहचान जन्म के समय निर्धारित लिंग से अलग होती है। यानी सभी किन्नर ट्रांसजेंडर हो सकते हैं, लेकिन सभी ट्रांसजेंडर किन्नर नहीं होते। ट्रांसजेंडर एक आधुनिक और कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त शब्द है।
भारत में कितने ट्रांसजेंडर हैं?
भारत में ट्रांसजेंडर लोगों की संख्या का आधिकारिक आंकड़ा 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 4.9 लाख (490,000) है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कई लोग सामाजिक कारणों से अपनी पहचान दर्ज नहीं कराते। सरकार द्वारा इस समुदाय के लिए विभिन्न योजनाएं और अधिकार भी दिए गए हैं।
ट्रांसजेंडर समुदाय क्या है?
यह एक ऐसा सामाजिक समूह है जिसमें वे लोग शामिल होते हैं जिनकी जेंडर पहचान पारंपरिक पुरुष या महिला की परिभाषा से अलग होती है। इसमें ट्रांसमैन, ट्रांसवुमन, नॉन-बाइनरी आदि पहचानें आती हैं। इस समुदाय को समान अधिकार देने के लिए Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019 लागू किया गया है, जो भेदभाव को रोकने और उनके अधिकारों की रक्षा करने का प्रावधान करता है।
ट्रांस गर्ल और नॉर्मल गर्ल में क्या अंतर है?
ट्रांस गर्ल वह व्यक्ति होती है जिसे जन्म के समय पुरुष के रूप में पहचाना गया था, लेकिन उसकी जेंडर पहचान महिला होती है। वहीं “नॉर्मल गर्ल” शब्द आमतौर पर उस लड़की के लिए उपयोग होता है जिसका जन्म और पहचान दोनों महिला के रूप में होते हैं। हालांकि “नॉर्मल” शब्द सही नहीं माना जाता, क्योंकि सभी लोगों की पहचान समान रूप से सम्माननीय होती है।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :