हैदराबाद। हैदराबाद के केबीआर पार्क (KBR Park) के इको-सेंसिटिव जोन में पेड़ों की कटाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए इस पर तत्काल रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है। यह मामला उस प्रस्तावित फ्लाईओवर परियोजना से जुड़ा है, जिसे राज्य सरकार ने केबीआर पार्क के आसपास यातायात सुगम बनाने के उद्देश्य से शुरू किया था। कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल सभी निर्माण गतिविधियाँ रोक दी गई हैं। ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम ने जुबली हिल्स (Jubilee Hills) और बंजारा हिल्स क्षेत्र में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए “ग्रेड सेपरेटर कॉरिडोर परियोजना” प्रस्तावित की थी।
फ्लाईओवर परियोजना पर लगी अस्थायी रोक
इस परियोजना का उद्देश्य “ग्रीन हैदराबाद” की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना बताया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि परियोजना केबीआर पार्क के इको-सेंसिटिव जोन को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करेगी और “जीरो पार्क इंट्रूज़न” नीति के तहत निर्माण कार्य केवल मौजूदा सड़क मध्य (मेडियन) तक ही सीमित रहेगा। इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि पार्क के भीतर किसी भी पेड़ को नहीं काटा जाएगा, बल्कि केवल सड़क के मध्य में मौजूद कुछ पेड़ों को उन्नत ट्रांसप्लांट तकनीक के जरिए अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। हालांकि, न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुयान की पीठ ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए पेड़ों की कटाई पर रोक बरकरार रखी और परियोजना पर फिलहाल रोक लगा दी।
केबीआर पार्क क्यों प्रसिद्ध है?
केबीआर नेशनल पार्क हरियाली, मॉर्निंग वॉक और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। शहर के बीच स्थित यह पार्क प्राकृतिक वातावरण और शांत माहौल प्रदान करता है। यहां कई प्रकार के पेड़-पौधे, पक्षी और छोटे वन्यजीव पाए जाते हैं। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग सुबह और शाम यहां व्यायाम तथा टहलने के लिए आते हैं। पर्यावरण संरक्षण और शहरी हरियाली बनाए रखने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान किसके लिए प्रसिद्ध है?
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और गुफाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां दुर्लभ वन्यजीव, झरने और जैव विविधता देखने को मिलती है। तीरथगढ़ जलप्रपात और कुटुमसर गुफाएं पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण माने जाते हैं। यह क्षेत्र बस्तर की आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक वातावरण के कारण भी खास पहचान रखता है। प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह लोकप्रिय पर्यटन स्थल माना जाता है।
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान घूमने का सबसे अच्छा समय क्या है?
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से अप्रैल के बीच माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और वन्यजीवों को देखने की संभावना अधिक होती है। सर्दियों में यहां प्रवासी पक्षी भी बड़ी संख्या में दिखाई देते हैं। मानसून के समय कई हिस्सों में यात्रा प्रतिबंधित हो सकती है। जंगल सफारी और प्रकृति दर्शन के लिए सुबह और शाम का समय विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है।
नेशनल पार्क का टिकट कितना है?
देश के अलग-अलग राष्ट्रीय उद्यानों में प्रवेश शुल्क अलग होता है। सामान्य तौर पर भारतीय पर्यटकों के लिए टिकट लगभग 50 से 300 रुपये तक हो सकता है, जबकि विदेशी पर्यटकों के लिए शुल्क अधिक रखा जाता है। सफारी, कैमरा और वाहन शुल्क अलग से लिया जा सकता है। कई पार्कों में ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। टिकट दरें मौसम, पार्क के नियम और पर्यटन गतिविधियों के अनुसार बदल सकती हैं।
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