हैदराबाद। वारसिगुडा पुलिस ने शनिवार को एक फर्जी डॉक्टर (Fake Doctor) को गिरफ्तार किया है, जो बिना किसी वैध मेडिकल योग्यता के अवैध रूप से इलाज कर लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहा था। पुलिस ने वारासिगुडा स्थित “माधव मेडिकल शॉप” के नाम से चल रहे इस अवैध क्लिनिक का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान नन्नुता माधव (42 वर्ष), निवासी वारसिगुडा (Warsiguda) (मूल निवासी भूपालपल्ली) के रूप में हुई है। आरोपी इंटरमीडिएट फेल है और उसके पास कोई मेडिकल, क्लिनिकल या फार्मेसी संबंधी योग्यता नहीं है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने मित्र के नाम पर मौजूद ड्रग लाइसेंस का दुरुपयोग कर अवैध क्लिनिक शुरू किया था और पिछले एक वर्ष से बिना किसी डॉक्टर की अनुमति के मरीजों का इलाज कर रहा था।
एक हेड कांस्टेबल बनकर गया था मरीज, खुली पोल
पुलिस ने बताया कि विश्वसनीय सूचना के आधार पर डिकॉय ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें एक हेड कांस्टेबल ने मरीज बनकर आरोपी से संपर्क किया। जैसे ही आरोपी ने इंजेक्शन लगाने की कोशिश की, पुलिस टीम ने मौके पर छापा मारकर उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। मौके से डिक्लोफेनाक और टेटनस टॉक्सॉयड (टीटी) इंजेक्शन वायल्स तथा एक सैमसंग मोबाइल फोन बरामद किया गया, जिसका उपयोग वह अपने अवैध व्यवसाय के लिए करता था। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह बिना किसी वैध प्रिस्क्रिप्शन के प्रतिबंधित इंजेक्शन भी मरीजों को लगा रहा था। इस संबंध में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे केवल पंजीकृत एवं योग्य चिकित्सकों (आरएमपी /डॉक्टर) से ही उपचार कराएं और किसी भी फर्जी चिकित्सक की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
क्लिनिक कौन खोल सकता है?
आमतौर पर मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री या संबंधित स्वास्थ्य क्षेत्र की वैध योग्यता रखने वाले व्यक्ति क्लिनिक चला सकते हैं। डॉक्टर, दंत चिकित्सक, आयुर्वेद, होम्योपैथी या अन्य पंजीकृत चिकित्सा विशेषज्ञ अपने क्षेत्र के नियमों के अनुसार क्लिनिक खोल सकते हैं। इसके लिए स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और संबंधित मेडिकल काउंसिल के नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है। मरीजों की सुरक्षा और कानूनी मानकों को ध्यान में रखते हुए लाइसेंस और पंजीकरण महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
1 साल का कौन सा मेडिकल कोर्स है?
स्वास्थ्य क्षेत्र में कई अल्पकालिक डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स उपलब्ध होते हैं, जिनकी अवधि लगभग एक वर्ष हो सकती है। इनमें लैब तकनीशियन, मेडिकल असिस्टेंट, हेल्थ वर्कर, एक्स-रे तकनीशियन और फार्मेसी से जुड़े कुछ प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं। अलग-अलग संस्थानों में कोर्स की अवधि और पात्रता अलग हो सकती है। रोजगार और प्रशिक्षण की गुणवत्ता के लिए मान्यता प्राप्त संस्थान से पढ़ाई करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत में बिना डॉक्टर बने क्लिनिक कैसे खोलें?
बिना वैध चिकित्सा योग्यता के इलाज करने या डॉक्टर के रूप में कार्य करना कानून के खिलाफ माना जा सकता है। हालांकि कोई व्यक्ति कानूनी रूप से डायग्नोस्टिक सेंटर, हेल्थकेयर मैनेजमेंट सेवा या पंजीकृत डॉक्टरों के साथ साझेदारी में स्वास्थ्य सुविधा केंद्र चला सकता है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित नियमों का पालन जरूरी होता है। मरीजों की सुरक्षा और कानूनी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए योग्य चिकित्सा विशेषज्ञों की सेवाएं लेना महत्वपूर्ण माना जाता है।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :