हैदराबाद। तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) के अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने कहा है कि राज्य सरकार जल्द ही विश्व ब्राह्मण विश्वकर्मा निगम के लिए शासी समिति का गठन करेगी और समुदाय के कल्याण के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। गांधी भवन में आयोजित एक बैठक के दौरान उन्होंने यह आश्वासन दिया। इस बैठक में तेलंगाना राज्य विश्व ब्राह्मण विश्वकर्मा मातृ संघ के प्रतिनिधियों ने एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें समुदाय की आर्थिक कठिनाइयों को उजागर करते हुए तत्काल संस्थागत सहायता की मांग की गई। महेश कुमार गौड़ (Mahesh Kumar Gaur) ने कहा कि सरकार सभी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से पिछड़े वर्गों के न्याय के लिए प्रतिबद्ध है और विश्व ब्राह्मण विश्वकर्मा समुदाय को भी उसका उचित हिस्सा मिलेगा।
समुदाय की जनसंख्या लगभग 16 लाख
संघ के नेताओं ने बताया कि राज्य में इस समुदाय की जनसंख्या लगभग 16 लाख है और पारंपरिक व्यवसाय पिछले वर्षों में कॉरपोरेट संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं, जिससे कारीगरों और श्रमिकों को बेरोजगारी और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। संघ के अध्यक्ष डॉ. वेंकटा मदनमोहन, मानद अध्यक्ष डॉ. लालुकोटा वेंकटाचार्य और महासचिव ब्रह्मश्री चोलेटी कृष्णमाचार्युलु सहित अन्य नेताओं ने कहा कि समुदाय से जुड़े कई लंबित मुद्दों का समाधान वर्षों से नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द कल्याण निधि जारी करने और शासी समिति के गठन की मांग की।
तेलंगाना में हिंदुओं की आबादी कितनी है?
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल आबादी में लगभग 85 प्रतिशत लोग हिंदू धर्म को मानते हैं। इसके अलावा मुस्लिम, ईसाई, सिख और अन्य समुदायों के लोग भी यहां निवास करते हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता इस क्षेत्र की प्रमुख विशेषताओं में गिनी जाती है। बोनालू, बथुकम्मा और दशहरा जैसे त्योहार बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मंदिरों और पारंपरिक धार्मिक आयोजनों का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
तेलंगाना राज्य का मुख्य भोजन क्या है?
चावल यहां का प्रमुख भोजन माना जाता है और इसे दाल, सांभर तथा विभिन्न सब्जियों के साथ खाया जाता है। मसालेदार स्वाद वाले व्यंजन इस क्षेत्र की खास पहचान हैं। हैदराबादी बिरयानी दुनियाभर में प्रसिद्ध मानी जाती है। इसके अलावा सरवा पिंडी, जोन्ना रोट्टे, सकिनालु और पचड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजन भी काफी लोकप्रिय हैं। लाल मिर्च, इमली और देसी मसालों का उपयोग भोजन को विशेष स्वाद देता है। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में पारंपरिक खानपान की मजबूत पहचान देखने को मिलती है।
तेलंगाना का दूसरा नाम क्या है?
ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र को “त्रिलिंग देश” कहा जाता था। माना जाता है कि यह नाम तीन प्रमुख शिव मंदिरों — कालेश्वरम, श्रीशैलम और द्राक्षारामम — से जुड़ा हुआ है। समय के साथ यही शब्द बदलकर वर्तमान नाम बना। दक्षिण भारत की संस्कृति, भाषा और परंपराओं में इस क्षेत्र की अलग पहचान रही है। वर्ष 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर इसे नया राज्य बनाया गया। आईटी उद्योग, ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक उत्सवों के कारण यह देश के महत्वपूर्ण राज्यों में गिना जाता है।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :