हैदराबाद। तेलंगाना राज्य के उपभोक्ता (Consumer) मामले और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य में पेट्रोल, डीजल या घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है। आपूर्ति विभाग ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि तेल रिफाइनरियों से स्थानीय डिपो तक की आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह कार्यरत है और सभी जिलों में नागरिकों की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। कुछ रिटेल पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों और अस्थायी ‘स्टॉक नहीं’ बोर्ड की खबरें केवल झूठी अफवाहों के कारण अचानक पैनिक खरीदारी का नतीजा हैं। जब लोग अपने टैंकों को पूरी क्षमता तक भरने के लिए अनावश्यक (Unnecessary) रूप से दौड़ते हैं, तो यह कृत्रिम कमी पैदा करता है, जबकि डिपो में पर्याप्त ईंधन उपलब्ध है।
आपूर्ति की कमी से कोई संबंध नहीं
इसके अलावा, हाल ही में तेल विपणन कंपनियों द्वारा अग्रिम भुगतान मॉडल में किए गए प्रशासनिक बदलावों के कारण कुछ स्थानीय डीलरों के लिए अस्थायी लॉजिस्टिक समायोजन हुआ है। यह केवल आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था है और आपूर्ति की कमी से कोई संबंध नहीं है। स्थिति को नियंत्रित करने और निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें, तेल विपणन कंपनियों और पुलिस विभाग के साथ मिलकर ईंधन आउटलेट्स की निगरानी कर रही हैं। किसी को ईंधन की जमाखोरी, ब्लैक मार्केटिंग या घरेलू एलपीजी सिलेंडरों को वाणिज्यिक उपयोग के लिए अवैध रूप से मोड़ने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने सभी नागरिकों से शांत रहने और पैनिक खरीदारी से बचने की अपील की है। जनता से अनुरोध है कि केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि की अफवाहों को न फैलाएं। किसी भी सवाल या अनियमितताओं की रिपोर्ट करने के लिए नागरिक सिविल सप्लाइज टोल-फ्री हेल्पलाइन 1967 पर संपर्क कर सकते हैं।
लोग घबराकर पेट्रोल क्यों खरीद रहे हैं?
अचानक कीमत बढ़ने या सप्लाई में कमी की खबर फैलने पर लोग घबराकर ज्यादा मात्रा में पेट्रोल खरीदने लगते हैं। अफवाहें और सोशल मीडिया भी इस व्यवहार को बढ़ा देते हैं। कई बार हड़ताल, परिवहन बाधा या अंतरराष्ट्रीय संकट की खबर से लोगों को लगता है कि भविष्य में ईंधन मिलना मुश्किल हो सकता है, इसलिए वे पहले ही स्टॉक करने लगते हैं।
भारत में ईंधन अधिक महंगा क्यों हो रहा है?
कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण होते हैं, जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ना, टैक्स और मुद्रा विनिमय दर में बदलाव। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों का सीधा असर पड़ता है। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए कर भी कीमत को प्रभावित करते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को ज्यादा भुगतान करना पड़ता है।
पेट्रोल का संकट क्यों है?
कमी की स्थिति आमतौर पर आपूर्ति बाधित होने या मांग अचानक बढ़ने से उत्पन्न होती है। रिफाइनरी में तकनीकी समस्या, परिवहन में रुकावट या अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। कभी-कभी अफवाहों के कारण भी लोग ज्यादा खरीदारी करने लगते हैं, जिससे अस्थायी कमी पैदा हो जाती है। हालांकि सामान्य परिस्थितियों में यह समस्या जल्दी ही नियंत्रण में आ जाती है।
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