मंत्री ने टीजीआईआईसी भवन का किया निरीक्षण
हैदराबाद। श्रम, रोजगार एवं खनन मंत्री डॉ. जी. विवेक वेंकटस्वामी (Dr. G. Vivek Venkataswamy) ने कहा कि जर्मनी और जापान जैसे देशों में नर्सों की भारी मांग है, जहां उन्हें प्रति माह 2 लाख रुपए तक का वेतन मिल सकता है। उन्होंने बताया कि रोजगार के अवसरों का अध्ययन करने के लिए जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल जर्मनी का दौरा करेगा। मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि इज़राइल में निर्माण क्षेत्र में नौकरियों के लिए करीब 1,000 उम्मीदवारों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है। हालांकि, वहां चल रहे युद्ध के कारण फिलहाल इस प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि हालात सामान्य होने पर इसे फिर से शुरू किया जाएगा। इससे पहले मंत्री (Minister) ने प्रधान सचिव दाना किशोर के साथ हैदराबाद के मसाब टैंक स्थित टीजीआईआईसी भवन का निरीक्षण किया।
टाकाम कार्यालय स्थापित करने के लिए भवन को लीज पर लिया
रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग ने यहां टाकाम कार्यालय स्थापित करने के लिए भवन को लीज पर लिया है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यालय का बुनियादी ढांचा इस प्रकार विकसित किया जाए कि विदेश में रोजगार की इच्छा रखने वाले युवाओं को समग्र प्रशिक्षण मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य टामकाम के माध्यम से बड़े पैमाने पर विदेशी रोजगार के अवसर सृजित करना है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क के नेतृत्व में टाकाम के लिए 90 करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया है। उम्मीदवारों को विदेशी संस्कृति, भाषा और जीवनशैली पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे विदेश में आसानी से समायोजित हो सकें।
काफी लाभकारी होगी 2,000 की छात्रवृत्ति
छात्रों के लिए सहायता का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सेंटर में पढ़ने वाले छात्रों के लिए शुरू की गई 2,000 की छात्रवृत्ति काफी लाभकारी होगी। इन केंद्रों से इच्छुक उम्मीदवारों की पहचान कर उन्हें विदेश रोजगार के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि टीजीआईआईसी भवन में छात्रों को एंड-टू-एंड प्रशिक्षण देने के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही, विदेश में नौकरी करने के इच्छुक युवाओं से टामकाम में पंजीकरण कराने की अपील की।
जापान ने जर्मनी पर कब हमला किया था?
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान और जर्मनी एक ही पक्ष (Axis Powers) में थे, इसलिए जापान ने जर्मनी पर हमला नहीं किया। दोनों देशों ने मिलकर मित्र राष्ट्रों के खिलाफ युद्ध लड़ा। इस कारण इतिहास में ऐसा कोई समय नहीं है जब जापान ने जर्मनी पर आक्रमण किया हो।
कौन सा अमीर है, जापान या जर्मनी?
आर्थिक दृष्टि से दोनों ही देश बहुत विकसित हैं, लेकिन कुल GDP के आधार पर जर्मनी और जापान दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। आमतौर पर हाल के वर्षों में जर्मनी की अर्थव्यवस्था यूरोप में सबसे बड़ी रही है, जबकि जापान एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था है। “अमीर” होने का निर्धारण प्रति व्यक्ति आय और आर्थिक स्थिरता जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।
जर्मनी का दूसरा नाम क्या था?
इतिहास में जर्मनी को अलग-अलग समय पर अलग नामों से जाना गया, जैसे “जर्मन साम्राज्य” (German Empire) और नाजी जर्मनी (1933–1945)। इसके अलावा जर्मन भाषा में इसे “डॉइचलैंड” (Deutschland) कहा जाता है, जो आज भी इसका आधिकारिक नाम है।
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