ग्रेहाउंड्स कर्मियों को विशेष ऑपरेशन पदक
हैदराबाद। पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी ने मंगलवार को बलिमेला जलाशय (Balimela Reservoir) हमले में शहीद हुए पुलिस कर्मियों के परिवारों को मकान पट्टे सौंपे, जिससे उनकी 18 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा समाप्त हुई। 29 जून 2008 की इस दुखद घटना को याद करते हुए डीजीपी ने कहा कि माओवादियों द्वारा किए गए हमले में 38 पुलिसकर्मियों, जिनमें 32 ग्रेहाउंड कमांडो शामिल थे, की जान गई थी। यह हमला तब हुआ था जब ग्रेहाउंड बल के जवानों को ले जा रही नाव पर गोलीबारी और ग्रेनेड से हमला किया गया, जिससे वह बलिमेला जलाशय में डूब गई। हैदराबाद स्थित डीजीपी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में 33 पात्र लाभार्थियों को पट्टे वितरित किए गए। भूमि आवंटन का यह मामला कानूनी और सर्वेक्षण (Survey) संबंधी समस्याओं के कारण वर्षों से लंबित था, जिसे मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद सुलझाया गया।
अड़चनों के चलते लंबित रहा यह कार्य
सरकार ने वर्ष 2013 में ही भूखंड आवंटित किए थे, लेकिन अतिक्रमण और अन्य प्रक्रियात्मक अड़चनों के चलते यह कार्य लंबित रहा। पिछले वर्ष अक्टूबर में संशोधित आदेश जारी होने के बाद पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी हो सकी। डीजीपी ने शहीदों के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए इसे उनके बलिदान का सम्मान बताया। इस अवसर पर अतिरिक्त डीजीपी (ग्रेहाउंड्स) अनिल कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी लंबित तकनीकी समस्याओं के समाधान पर संतोष व्यक्त किया। ग्रेहाउंड्स के चार कर्मियों को वर्ष 2024 के लिए प्रतिष्ठित केंद्रीय गृह मंत्री विशेष ऑपरेशन पदक (दक्षता पदक) के लिए चुना गया है। डीजीपी शिवधर रेड्डी ने ग्रुप कमांडर जाजाला राघवेंद्र रेड्डी, सीनियर कमांडो टिप्पानी राकेश, उदुतनुरी मल्लैया और जूनियर कमांडो गंटा साई कुमार को उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए बधाई दी।
जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला किसने लिया था?
इतिहास में दर्ज है कि जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला उधम सिंह ने लिया था। उन्होंने 1940 में लंदन में माइकल ओ’ड्वायर की हत्या कर इस नरसंहार का प्रतिशोध लिया। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण अध्याय मानी जाती है, जिसने देशभर में अंग्रेजों के खिलाफ आक्रोश को और बढ़ाया।
बालीमेला बांध किस जिले में है?
स्थान के अनुसार बालीमेला बांध मलकानगिरी जिला में स्थित है। यह बांध ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा के पास बना हुआ है और क्षेत्र के प्रमुख जल परियोजनाओं में शामिल है, जो बिजली उत्पादन और सिंचाई दोनों के लिए उपयोगी है।
बालीमेला बांध का इतिहास क्या है?
निर्माण की दृष्टि से बालीमेला बांध का निर्माण 1960 के दशक में शुरू हुआ और 1970 के दशक में पूरा किया गया। यह परियोजना सिलेरु नदी पर बनाई गई थी, जो गोदावरी नदी की सहायक नदी है। इस बांध का उद्देश्य जलविद्युत उत्पादन और सिंचाई सुविधा प्रदान करना था, जिससे आसपास के क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिला।
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