Hyderabad : एचसीए अध्यक्ष और अन्य को 6 दिन की सीआईडी हिरासत

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अदालत में दायर की थी याचिका

हैदराबाद। मलकाजगिरी अदालत ने एचसीए (HCA) के अध्यक्ष जगन मोहन राव और अन्य को अपराध जांच विभाग को छह दिन की पुलिस हिरासत में सौंप दिया। सीआईडी ने जगन मोहन राव, एचसीए के कोषाध्यक्ष जेएस श्रीनिवास राव, एचसीए के सीईओ सुनील कांते, श्री चक्र क्रिकेट क्लब (Sri Chakra Cricket Club) के महासचिव राजेंद्र यादव और श्री चक्र क्रिकेट क्लब की अध्यक्ष जी कविता की हिरासत की मांग करते हुए अदालत में याचिका दायर की थी। इन पांचों को सीआईडी ने पिछले हफ्ते गिरफ्तार किया था

शिकायत के बाद दर्ज किया गया था मामला

सीआईडी के अनुसार, जगन मोहन और अन्य द्वारा धन के कथित दुरुपयोग को लेकर तेलंगाना क्रिकेट एसोसिएशन के महासचिव धरम गुरुवा रेड्डी की शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया था। जगन मोहन राव ने जी कविता और राजेंद्र यादव के साथ मिलकर श्री चक्र क्रिकेट क्लब, जिसे पहले गौलीपुरा क्रिकेट क्लब (जीसीसी) के नाम से जाना जाता था, के जाली दस्तावेज़ बनाए और जीसीसी के अध्यक्ष सी कृष्ण यादव के जाली हस्ताक्षर किए। उनके जाली दस्तावेज़ों को असली के रूप में इस्तेमाल किया गया, जिससे जगन मोहन को एचसीए में अध्यक्ष के रूप में बेईमानी से प्रवेश मिल गया। सीआईडी तेलंगाना की अतिरिक्त डीजीपी चारु सिन्हा ने पाँचों संदिग्धों की गिरफ्तारी के समय बताया था।

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सीआईडी का क्या काम होता है?

CID यानी अपराध जांच विभाग (Crime Investigation Department) का मुख्य कार्य जटिल अपराधों की गुप्त जांच करना होता है। इसमें हत्या, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद जैसे गंभीर मामलों की तहकीकात की जाती है। यह राज्य पुलिस का एक विशेष खुफिया विभाग होता है जो साक्ष्य जुटाने में माहिर होता है।

सीआईडी और पुलिस में क्या अंतर है?

CID विशेष रूप से अपराधों की जांच करती है, जबकि पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने, गश्त, और तुरंत प्रतिक्रिया देने जैसे कार्यों में लगी रहती है। सीआईडी को आमतौर पर कठिन या संगीन मामलों की जांच सौंपी जाती है, जबकि सामान्य अपराधों से निपटने का कार्य सामान्य पुलिस करती है।

सीआईडी का कानून क्या है?

CID किसी विशेष अधिनियम के अंतर्गत नहीं, बल्कि भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा गठित की जाती है। इसके अधिकारी पुलिस अधिकारी ही होते हैं, जिन्हें विशेष प्रशिक्षण और जिम्मेदारियां दी जाती हैं। यह कानून की जांच और अपराध विश्लेषण से संबंधित विभाग है।

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