हैदराबाद। आईटी एवं उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू (D. Sridhar Babu) ने कहा कि तेलंगाना 2047 तक भारत का प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब और वैश्विक लॉजिस्टिक्स गंतव्य बनने की संगठित योजना बना रहा है। उन्होंने ट्रांसपोर्ट लोजिस्टक इंडिया 2026 सम्मेलन में बताया कि राज्य की रणनीति में भविष्य-उन्मुख लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम तैयार करना, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, डिजिटल इंटीग्रेशन, सतत विकास और कौशल विकास शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि लॉजिस्टिक्स सेक्टर राज्य की दीर्घकालीन विकास दृष्टि (long term development vision) का केंद्र होगा और 2047 तक राज्य का जीडीपी में योगदान 5% से बढ़ाकर 10% तक करने का लक्ष्य है, जिससे $3 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने का रोडमैप तैयार होगा।
ग्रीन मोबिलिटी में निवेश के लिए किया आमंत्रित
उन्होंने वैश्विक रुझानों जैसे सप्लाई-चेन रीएलाइनमेंट, एआई-सक्षम लॉजिस्टिक्स और सतत विकास का हवाला देते हुए बताया कि तेलंगाना अपने स्ट्रैटेजिक लोकेशन का लाभ उठाकर प्रतिस्पर्धा बढ़ा रहा है। राज्य सरकार यंग इंडिया स्किल यूनिवसिर्टी और उद्योग हितधारकों के साथ मिलकर लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए कौशलयुक्त कार्यबल तैयार कर रही है। मंत्री ने निवेशकों को मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स, रेल-हवाई कनेक्टिविटी, एयर कार्गो, कोल्ड चेन, ग्रेड-ए वेयरहाउसिंग, ऑटोमेशन, डिजिटल लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म और ग्रीन मोबिलिटी में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य त्वरित अनुमोदन, पारदर्शी नीतियाँ और उद्योग-अनुकूल नियमावली उपलब्ध कराएगा।
अमृत काल 2047 का विजन क्या है?
यह संकल्प भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने से जुड़ा है। “अमृत काल” शब्द का प्रयोग प्रधानमंत्री Narendra Modi ने किया है। इसका उद्देश्य मजबूत अर्थव्यवस्था, आधुनिक बुनियादी ढांचा, डिजिटल प्रगति, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना है, ताकि 2047 तक भारत वैश्विक स्तर पर अग्रणी राष्ट्र बन सके।
तेलंगाना भारत का 29वां राज्य कब बना था?
नया राज्य 2 जून 2014 को आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आया। इससे पहले यह आंध्र प्रदेश का हिस्सा था। लंबे आंदोलन और राजनीतिक प्रक्रिया के बाद संसद ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम पारित किया। इसके बाद Hyderabad को दोनों राज्यों की साझा राजधानी घोषित किया गया, जो बाद में केवल तेलंगाना की राजधानी बनी।
2047 का मिशन क्या है?
इस लक्ष्य का केंद्र बिंदु विकसित भारत का निर्माण है। आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन, तकनीकी नवाचार, हरित ऊर्जा और सामाजिक समानता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बुनियादी ढांचे का विस्तार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार, तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती इस मिशन के मुख्य तत्व हैं, ताकि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक देश आत्मनिर्भर और समृद्ध बन सके।
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