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Politics : महज कागजों का पुलिंदा है केंद्रीय बजट – सूरज तिवारी

Ajay Kumar Shukla
Ajay Kumar Shukla
Politics : महज कागजों का पुलिंदा है केंद्रीय बजट – सूरज तिवारी

हैदराबाद। तेलंगाना कांग्रेस (Telangana Congress) के सचिव (प्रोटोकाल कमेटी) ने केंद्रीय बजट 2026–27 की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह आम नागरिकों के हित में नहीं है। बजट में गरीबों के लिए कुछ नहीं किया गया है। महज यह बजट कागजों का पुलिंदा रह गया है। उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ रही है। आम लोग दो जून की रोटी जुटाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे है। यह बजट केवल भाजपा के साथ रहने वाले उद्योगपतियों को फायदा देने वाला है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय वित्त मंत्री (Union Finance Minister) निर्मला सीतारमणन को इस्तीफा दे देना चाहिए।

सोने के दाम लगातार बढ़ते जा रहा है। पड़ोसी देश नेपाल में भारत से सोने का दाम 10 से 15 हजार रुपए कम है। यह सरकार केवल घोटालों करने वालों का सहयोग कर रही है। केन्द्रीय बजट में वरिष्ठ नागरिकों, बेरोजगारों, गरीबों के लिए कुछ राहत नहीं दी गई है।

2025 से 2026 के लिए केंद्रीय बजट क्या है?

भारत सरकार का केंद्रीय बजट 2025–26 उस वित्तीय वर्ष की आर्थिक रूपरेखा है जो 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक लागू रहती है। इसमें सरकार की आय, खर्च, कर नीतियाँ और विकास प्राथमिकताएँ तय की जाती हैं। बजट में आम तौर पर कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचा, सामाजिक कल्याण और रोजगार पर ध्यान दिया जाता है। इसका उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना, महंगाई नियंत्रित रखना और समाज के कमजोर वर्गों को राहत देना होता है।

2025 से 2026 के लिए बजट क्या है?

असल में, बजट 2025–26 भारत की आर्थिक योजना का आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसे केंद्र सरकार संसद में प्रस्तुत करती है। यह बताता है कि सरकार अगले एक साल में पैसा कहाँ से जुटाएगी और किन क्षेत्रों में खर्च करेगी। इसमें टैक्स से जुड़े प्रस्ताव, सब्सिडी, योजनाएँ और नीतिगत सुधार शामिल रहते हैं। बजट का मुख्य लक्ष्य राजकोषीय संतुलन बनाए रखते हुए विकास, निवेश और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना होता है।

सोना चढ़ेगा या गिरेगा?

सोने के भाव आम तौर पर लंबे समय में बढ़ने की प्रवृत्ति दिखाते हैं, लेकिन बीच-बीच में गिरावट भी आती है। महंगाई, ब्याज दरें, डॉलर की मजबूती, युद्ध या आर्थिक संकट जैसे कारण सोने को ऊपर ले जाते हैं। वहीं शेयर बाजार मजबूत हो तो सोना कुछ समय के लिए गिर सकता है। यानी निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव संभव है, पर लंबी अवधि में सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है।

2030 में सोना कितने भाव तक पहुंचेगा?

2030 तक सोने की कीमत को लेकर अनुमान हैं, पक्की गारंटी नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार अगर महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है तो सोना ₹1.25 लाख से ₹1.75 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुँच सकता है। कुछ आक्रामक अनुमान इससे भी ऊँचे हैं। हालांकि सरकारों की नीतियाँ और वैश्विक हालात बदले तो यह अनुमान ऊपर-नीचे हो सकता है।

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