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Kishan-Reddy : किशन रेड्डी ने खनिज अन्वेषण को मिशन मोड में तेज करने के दिए निर्देश

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: May 26, 2026 • 3:37 PM
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Kishan-Reddy : बेंगलुरु। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी (Kishan Reddy) ने खनन और अन्वेषण से जुड़ी सभी एजेंसियों को लंबित परियोजनाओं में तेजी लाने तथा मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे देश की खनिज सुरक्षा और रणनीतिक विकास को मजबूती मिलेगी। बेंगलुरु में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, राष्ट्रीय शैल यांत्रिकी संस्थान, भारतीय खान ब्यूरो तथा रिमोट सेंसिंग एवं एरियल सर्वे डिवीजन (Aerial Survey Division) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक संस्थागत प्रक्रिया की नींव तकनीक, पारदर्शिता और दक्षता पर आधारित होनी चाहिए।

परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन और तकनीकी दक्षता बढ़ाने पर जोर

किशन रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, और इसमें खनन एवं अन्वेषण क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र देश की औद्योगिक वृद्धि और रणनीतिक खनिज सुरक्षा को सुनिश्चित करने में अहम योगदान देगा। समीक्षा बैठकों में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों, लिथियम, निकल, कोबाल्ट, टंगस्टन, वैनेडियम और प्लैटिनम समूह के तत्वों जैसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के अन्वेषण कार्यों में तेजी लाने पर विशेष चर्चा हुई। मंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रिमोट सेंसिंग और एकीकृत भू-वैज्ञानिक विश्लेषण के उपयोग के माध्यम से खनिज अन्वेषण प्रणाली के आधुनिकीकरण पर भी बल दिया।

संस्था ने प्रस्तुत की आगामी पांच वर्षों की रूपरेखा

बैठक के दौरान भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने कर्नाटक और गोवा में चल रहे अन्वेषण कार्यों की जानकारी दी, जिसमें सोना, तांबा, निकल, कोबाल्ट और प्लैटिनम समूह के तत्वों वाले क्षेत्रों की पहचान शामिल है। संस्था ने आगामी पांच वर्षों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की, जिसके तहत लगभग 48,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में थीमैटिक मैपिंग और एआई/एमएल आधारित खनिज लक्ष्य निर्धारण किया जाएगा। भारतीय खान ब्यूरो (आईबीएम) ने सतत खनन, वैज्ञानिक खदान बंदी प्रक्रियाओं और राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के तहत खनिज पुनर्प्राप्ति पहलों की समीक्षा प्रस्तुत की। वहीं राष्ट्रीय शैल यांत्रिकी संस्थान (एनआईआरएम) ने खनन सुरक्षा, सुरंग इंजीनियरिंग, भूकंपीय निगरानी और जलविद्युत परियोजनाओं में अपने योगदान की जानकारी दी।

6.5 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का सर्वेक्षण पूरा

रिमोट सेंसिंग एवं एरियल सर्वे डिवीजन ने बताया कि राष्ट्रीय एरो-जियोफिजिकल मैपिंग कार्यक्रम के तहत अब तक 6.5 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है, जिससे 200 से अधिक अन्वेषण परियोजनाएं शुरू हुई हैं। बेंगलुरु दौरे के दौरान मंत्री किशन रेड्डी ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के अंतरराष्ट्रीय केंद्र का भी दौरा किया और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि भारत को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर ले जाने में वैज्ञानिक प्रगति के साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का संतुलन भी आवश्यक है।

खनिज अन्वेषण क्या है?

पृथ्वी की सतह के नीचे छिपे खनिज भंडारों की खोज और पहचान करने की प्रक्रिया को खनिज अन्वेषण कहते हैं। इसमें भूगर्भीय सर्वेक्षण, रासायनिक परीक्षण, ड्रिलिंग और उपग्रह तकनीक का उपयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि किस स्थान पर कितनी मात्रा में खनिज मौजूद हैं और उनका व्यावसायिक दोहन संभव है या नहीं।

खनिज अन्वेषण का उदाहरण क्या है?

झारखंड और ओडिशा में लौह अयस्क के भंडारों की खोज खनिज अन्वेषण का सबसे बड़ा उदाहरण है। राजस्थान में सीसा-जस्ता खदानों की खोज, छत्तीसगढ़ में कोयला भंडारों का पता लगाना और गुजरात में तेल एवं प्राकृतिक गैस की खोज भी इसी श्रेणी में आते हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) यह कार्य देशभर में करता है।

खनन के 4 प्रकार क्या हैं?

खनन के चार प्रमुख प्रकार इस प्रकार हैं — पहला, खुली कटाई खनन (Open Cast Mining) जिसमें जमीन की ऊपरी परत हटाकर खनिज निकाले जाते हैं। दूसरा, भूमिगत खनन (Underground Mining) जिसमें जमीन के अंदर सुरंग बनाकर खनिज निकाले जाते हैं। तीसरा, ड्रेजिंग (Dredging) जिसमें नदी या समुद्र तल से खनिज निकाले जाते हैं। चौथा, प्लेसर खनन (Placer Mining) जिसमें रेत और बजरी से मूल्यवान खनिज अलग किए जाते हैं।

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