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Telangana : नशीली दवाओं की अवैध बिक्री और लेबल से छेड़छाड़ का खुलासा

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: February 7, 2026 • 11:55 PM
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डीसीए की तेलंगाना के दो जिलों में कार्रवाई

हैदराबाद। तेलंगाना ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन (DCA) ने महबूबाबाद और भद्राद्री–कोठागुडेम जिलों में दो गंभीर मामलों का खुलासा किया है। निदेशक जनरल, ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन, तेलंगाना, शाहनवाज क़ासिम ने बताया कि महाबूबाबाद में नशीली दवाओं की अवैध बिक्री की जा रही थी। बीते 6 फरवरी को मारिपेडा गांव स्थित श्री लक्ष्मी गणपति मेडिकल और जनरल स्टोर्स में छापेमारी के दौरान अधिकारीयों ने पाया कि दुकान संचालक उपेंद्र मलोठ नशीली दवाएं जैसे ट्रामाडोल इंजेक्शन, ट्रामाडोल (Tramadol) टैबलेट और अल्प्राज़ोलम टैबलेट अवैध रूप से बेच रहे थे। जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने दवाओं की बिक्री में प्रिस्क्रिप्शन का पालन नहीं किया, बिक्री बिल और दवा रजिस्टर नहीं रखे, और ड्रग्स नियमों के अन्य उल्लंघन किए।

पुलिस अधिकारियों के सहयोग से कार्रवाई

रिकार्ड और दस्तावेज जब्त किए गए। ड्रग्स इंस्पेक्टर एस. उमरानी, महाबूबाबाद की अगुवाई में और सहायक निदेशक एम. अरविंद कुमार, खम्मम के पर्यवेक्षण में पुलिस अधिकारियों के सहयोग से यह कार्रवाई की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रामाडोल और अल्प्राज़ोलम जैसी नशीली दवाओं का गलत इस्तेमाल गंभीर शारीरिक और मानसिक नतीजों, जैसे साँस लेने में दिक्कत, दौरे, कोमा और मृत्यु तक का कारण बन सकता है। अवैध बिक्री पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत दो साल तक की सजा हो सकती है। इसी क्रम में भद्राद्री–कोत्तागुडेम में लेबल छेड़छाड़ का मामला सामने आया है।

आम बिक्री के लिए कराया गया उपलब्ध

डीसीए ने पलवनचा स्थित श्री लक्ष्मी श्रीनिवास मेडिकल और जनरल स्टोर्स में निरीक्षण के दौरान थायरोनॉर्म सौ एमसीजी टैबलेट्स के लेबल में छेड़छाड़ पाई। यह बैच ‘फार इंस्टीच्यूशन सप्लाई ओनली’ के लेबल को हटाकर आम बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया था। छापेमारी के दौरान यह स्टॉक जब्त कर लिया गया। भद्राद्री–कोत्तागुडेम के ड्रग्स इंस्पेक्टर जी. असवानी ने कार्रवाई को अंजाम दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, संस्थागत आपूर्ति के लिए रखी दवाओं का आम बिक्री के लिए उपयोग और लेबल में छेड़छाड़ कानूनन अपराध है और इसके लिए दो साल तक की जेल हो सकती है।

कौन सी दवाएं नशीले पदार्थ हैं?

आमतौर पर कुछ दवाएं चिकित्सकीय उपयोग के बावजूद नशीले पदार्थ की श्रेणी में आती हैं। इनमें मॉर्फिन, कोडीन, ट्रामाडोल, हेरोइन, अफीम, नींद की कुछ गोलियां, दर्द निवारक ओपिऑयड और कुछ सिरप शामिल हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना या अधिक मात्रा में लेने पर ये दवाएं शरीर और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती हैं तथा लत का कारण बन सकती हैं।

नशीली दवाएं क्या हैं?

सामान्यतः नशीली दवाएं वे पदार्थ होती हैं, जो मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर असर डालती हैं। इनके सेवन से अस्थायी सुख, राहत या उत्तेजना महसूस होती है, लेकिन लंबे समय में यह शरीर को कमजोर और मानसिक रूप से निर्भर बना देती हैं। शराब, गांजा, अफीम, हेरोइन और कुछ दवाइयां नशीली श्रेणी में आती हैं, जिनका दुरुपयोग गंभीर समस्या बन सकता है।

नशीली दवाओं का सेवन कब लत बन जाता है?

चिकित्सकीय दृष्टि से जब कोई व्यक्ति किसी दवा का बार-बार और बिना आवश्यकता के सेवन करने लगे, तब यह लत बन जाती है। अगर दवा न मिलने पर बेचैनी, चिड़चिड़ापन, नींद न आना या शारीरिक परेशानी होने लगे, तो यह निर्भरता का संकेत है। धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाना और नियंत्रण खो देना भी लत के प्रमुख लक्षण माने जाते हैं।

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