‘आंगनवाड़ी फोन घोटाले’ के आरोपों पर माफी की मांग
हैदराबाद। तेलंगाना की पंचायत राज (Panchayat Raj) एवं ग्रामीण विकास मंत्री दानसरी अनसूया सीतक्का ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री और बीआरएस अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव को कानूनी नोटिस जारी किया। इसमें आंगनवाड़ी केंद्रों को मोबाइल फोन वितरण से जुड़े कथित मानहानिकारक बयानों पर बिना शर्त सार्वजनिक माफी की मांग की गई है। अपने अधिवक्ता नागुलुरी कृष्ण कुमार के माध्यम से भेजे गए नोटिस में मंत्री ने 30 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोपों को ‘झूठा’ निराधार और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच के बिना लगाया गया’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये दावे बीआरएस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिए ”दुर्भावनापूर्ण इरादे” से प्रसारित किए गए, ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। नोटिस में केसीआर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Social Media Platforms) से संबंधित पोस्ट हटाने और 48 घंटे के भीतर सार्वजनिक माफी जारी करने को कहा गया है।
स्मार्टफोन की खरीद प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं
इसमें चेतावनी दी गई है कि ऐसा न करने पर उनके खिलाफ सिविल और आपराधिक मानहानि के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सीतक्का ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि स्मार्टफोन की खरीद प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। नोटिस के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया तेलंगाना टेक्नोलॉजी सर्विसेज लिमिटेड द्वारा संचालित की गई, जिसने निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत निविदाएं आमंत्रित कर अनुबंध प्रदान किया। नोटिस में कहा गया कि वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की एक टेंडर मूल्यांकन समिति ने निविदाओं का परीक्षण कर अंतिम निर्णय लिया और मंत्री इस समिति की सदस्य नहीं थीं तथा अनुबंध देने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
मंत्री ने आरोपों के आधार पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब टेंडर की कुल राशि लगभग 44 करोड़ रुपये है, तो 30 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप ”प्रथम दृष्टया झूठा और हास्यास्पद” है। नोटिस में यह भी कहा गया कि इन पोस्ट्स को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित किया गया और बीआरएस से जुड़े कई खातों ने इन्हें बढ़ावा दिया, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा।
”झूठा और दुर्भावनापूर्ण अभियान”
बाद में मीडिया से बातचीत में सीतक्का ने कहा कि बीआरएस इस मुद्दे पर लगातार ”झूठा और दुर्भावनापूर्ण अभियान” चला रही है, जिसके कारण उन्हें कानूनी कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने केसीआर से पार्टी के सोशल मीडिया विंग द्वारा फैलाए जा रहे कथित भ्रामक प्रचार की जिम्मेदारी लेने की मांग की, साथ ही स्पष्ट किया कि उनके प्रति कोई व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं है। मंत्री ने याद दिलाया कि इससे पहले भी उन्होंने ऐसे मामलों में कानूनी नोटिस जारी किए हैं। सीतक्का ने दोहराया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से तेलंगाना टेक्नोलॉजी सर्विसेज लिमिटेड के माध्यम से तय नियमों के अनुसार पूरी की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य विधानसभा में बीआरएस विधायक के. टी. रामाराव द्वारा लगाए गए समान आरोपों का खंडन करने के बाद पार्टी ने उनके खिलाफ अभियान और तेज कर दिया।
ग्राम पंचायत में 5 साल में कितना बजट आता है?
पांच वर्षों में ग्राम पंचायत को मिलने वाला बजट गांव की जनसंख्या, राज्य सरकार की योजनाओं और केंद्र की योजनाओं पर निर्भर करता है। आमतौर पर 5 साल में लगभग 50 लाख से लेकर 5 करोड़ रुपये तक का फंड आ सकता है। इसमें मनरेगा, 15वें वित्त आयोग, स्वच्छ भारत मिशन और अन्य योजनाओं का पैसा शामिल होता है। राशि हर पंचायत में अलग-अलग हो सकती है और काम के अनुसार खर्च की जाती है।
पंचायत राज के जनक कौन थे?
पंचायती राज व्यवस्था के जनक बलवंत राय मेहता को माना जाता है। उन्होंने 1957 में अपनी समिति की रिपोर्ट में तीन स्तरीय पंचायत प्रणाली की सिफारिश की थी। इसके बाद देश में पंचायत राज व्यवस्था लागू हुई। इस व्यवस्था का उद्देश्य गांव स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करना और लोगों को स्थानीय शासन में भागीदारी देना है, जिससे विकास कार्य तेजी से हो सके।
ग्राम पंचायत में कितना पैसा आया है कैसे चेक करें?
ग्राम पंचायत में आए पैसे की जानकारी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से देखी जा सकती है। इसके लिए पंचायत कार्यालय में जाकर रजिस्टर देख सकते हैं या सचिव से जानकारी ले सकते हैं। ऑनलाइन देखने के लिए ई-ग्राम स्वराज पोर्टल या राज्य की पंचायत वेबसाइट पर जाकर पंचायत का नाम चुनना होता है। वहां योजनाओं के अनुसार फंड और खर्च की पूरी जानकारी उपलब्ध रहती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :