Hyderabad : माधापुर एसआई रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

By Ajay Kumar Shukla | Updated: February 10, 2026 • 11:04 PM

हैदराबाद। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), रंगारेड्डी रेंज ने माधापुर पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर गंद्र विनय को मंगलवार को 50 हजार की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार, पुलिस अधिकारी ने शिकायतकर्ता को भविष्य में गिरफ्तार न करने और एक अपराध नोटिस (Crime Notice) की कॉपी देने के लिए यह रिश्वत मांगी थी। एसीबी ने आरोपी के पास से नगद जब्त किया। अधिकारियों ने बताया कि एसआई ने अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग किया। आरोपी को न्यायिक हिरासत के लिए एडिशनल स्पेशल जज एसीबी मामले, नामपल्ली के सामने पेश किया गया। मामले की जांच अभी जारी है, और सुरक्षा कारणों से शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी गई है।

रिश्वत क्या होता है?

किसी सरकारी या निजी कार्य को कराने, टालने या अपने पक्ष में मोड़ने के लिए अवैध रूप से दिया या लिया गया पैसा, वस्तु या लाभ रिश्वत कहलाता है। यह कानून और नैतिकता दोनों के विरुद्ध होता है। आमतौर पर रिश्वत का उद्देश्य नियमों को दरकिनार करना या अनुचित फायदा लेना होता है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर होती है और आम नागरिकों का भरोसा सिस्टम से उठने लगता है।

रिशवत क्या है?

हिंदी में “रिशवत” शब्द दरअसल “रिश्वत” का ही प्रचलित या अशुद्ध रूप माना जाता है। दोनों का अर्थ एक ही होता है—गलत लाभ के बदले दिया गया अवैध प्रलोभन। कई क्षेत्रों में बोलचाल की भाषा में “रिशवत” बोला जाता है, लेकिन शुद्ध और कानूनी शब्द “रिश्वत” ही है। अर्थ की दृष्टि से दोनों में कोई अंतर नहीं होता।

रिश्वत लेते पकड़े जाने पर क्या होता है?

यदि कोई व्यक्ति रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाता है। जांच के बाद गिरफ्तारी, निलंबन और विभागीय कार्रवाई हो सकती है। दोष सिद्ध होने पर जेल की सजा और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। सरकारी कर्मचारी की नौकरी भी जा सकती है। यह अपराध गंभीर माना जाता है, क्योंकि यह पूरे शासन तंत्र को नुकसान पहुँचाता है।

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