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ACB : एसीबी की बड़ी कार्रवाई, दो कर्मचारी रिश्वत लेते गिरफ्तार

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: May 26, 2026 • 3:54 PM
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ACB : हैदराबाद/वारंगल। भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (ACB) ने अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करते हुए दो सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। पहला मामला वारंगल जिले के पलकुर्थी का है, जहां सिंचाई एवं कमांड एरिया डेवलपमेंट विभाग के संभागीय कार्यकारी अभियंता गंटी श्रीकांत को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। एसीबी अधिकारियों ने उन्हें हनमकोंडा जिले के भवानी नगर स्थित उनके निजी आवास से गिरफ्तार किया। बताया गया कि आरोपी अधिकारी ने 10 डबल बेडरूम मकानों (Bedroom Houses) के निर्माण से संबंधित बिल पास करने और एम-बुक में अंतिम माप दर्ज करने के लिए रिश्वत की मांग की थी। यह मामला सितंबर 2022 से लंबित था। एसीबी ने आरोपी के पास से रिश्वत की रकम बरामद कर ली है।

रिकॉर्ड सहायक को रिश्वत लेते हुए किया गया गिरफ्तार

दूसरा मामला हैदराबाद के अमीरपेट का है। यहां उप विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कार्यरत रिकॉर्ड सहायक एस. शिवानंद को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। एसीबी के अनुसार, शिकायतकर्ता की मां हाल ही में सेवानिवृत्त हुई थीं। आरोपी कर्मचारी ने उनके सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़ी फाइल उच्च अधिकारियों को भेजने के लिए रिश्वत मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने जाल बिछाकर उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। दोनों आरोपियों के पास से अवैध धन बरामद कर लिया गया है। गिरफ्तार कर्मचारियों को विशेष न्यायाधीश (एसपीई एवं एसीबी मामलों) की अदालत में पेश किया गया।

वारंगल क्यों प्रसिद्ध है?

तेलंगाना में वारंगल अपने समृद्ध इतिहास और सुंदर आकर्षणों के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर काकतीय राजवंश की राजधानी थी। वारंगल को भारत के 11 महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहरों वाले शहरों में शुमार किया गया है और इसे HRIDAY (हेरिटेज सिटी डेवलपमेंट एंड ऑगमेंटेशन) योजना तथा स्मार्ट सिटी मिशन में भी शामिल किया गया था। 12वीं सदी का हजार पिलर मंदिर और वारंगल किला यहां के प्रमुख आकर्षण हैं।

वारंगल में कौन सी भाषा बोली जाती है?

तेलंगाना राज्य में स्थित है इसलिए यहां की मुख्य भाषा तेलुगु है। यह शहर काकतीय साम्राज्य का केंद्र रहा है जहां तेलुगु साहित्य और संस्कृति अत्यधिक फली-फूली। इसके अलावा उर्दू भी यहां बोली जाती है। हिंदी और अंग्रेजी भी व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोग होती हैं। तेलुगु को यहां शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त है।

वारंगल का युद्ध कब हुआ था?

कई बार आक्रमण हुए। पहला बड़ा युद्ध 1310 में हुआ जब दिल्ली सल्तनत के शासक अलाउद्दीन खिलजी ने अपने सेनापति मलिक काफूर को काकतीय राजधानी वारंगल पर आक्रमण के लिए भेजा। एक महीने की घेराबंदी के बाद काकतीय शासक प्रतापरुद्र ने संधि कर ली। अंतिम और निर्णायक युद्ध 1323 में हुआ जब मुहम्मद बिन तुगलक ने वारंगल पर आक्रमण किया, प्रतापरुद्र को बंदी बनाया और इस तरह काकतीय वंश का अंत हो गया।

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