हैदराबाद। सिकंदराबाद राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) तथा रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने संयुक्त अभियान चलाकर मुंबई से सिकंदराबाद लाई जा रही हवाला की 1 करोड़ 22 लाख 70 हजार रुपये की नकदी बरामद की है। इस प्रकरण में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार 26 मई 2026 को देवगिरि एक्सप्रेस में संयुक्त जाँच अभियान के दौरान बोलारम और मल्काजगिरि रेलवे स्टेशनों के बीच एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा गया। पूछताछ में उसकी पहचान विजय अंबादास गुप्ता (40 वर्ष), निवासी अमरावती जिला, महाराष्ट्र के रूप में हुई। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे मुंबई के एक आभूषण व्यापारी संतोष सेठ ने 1 करोड़ 22 लाख 70 हजार रुपये सिकंदराबाद पहुँचाने के लिए दिए थे। यह राशि मोंडा मार्केट में स्थित एक आभूषण कारोबारी ‘बंटी’ को सौंपनी थी।
आभूषण कारोबारी ‘बंटी’ को सौंपनी थी धनराशि
नकदी पहुँचाने के बदले आरोपी को 5 हजार रुपये देने की बात कही गई थी। जाँच के दौरान आरोपी नकदी से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका और न ही धनराशि के स्रोत तथा उपयोग के बारे में संतोषजनक जानकारी दे पाया। इसके बाद पुलिस ने उसके पास से मोबाइल फोन, पहचान पत्र और यात्रा टिकट जब्त कर लिए। आरोपी का बयान पंचों की उपस्थिति में दर्ज किया गया।
बरामद नकदी में 500 रुपये के 24 हजार नोट, 200 रुपये के 300 नोट तथा 100 रुपये के 2100 नोट शामिल हैं। कुल बरामद राशि 1 करोड़ 22 लाख 70 हजार रुपये बताई गई है। यह कार्रवाई थाना प्रभारी बी. साईश्वर गौड़, टी. माधव तथा उनकी टीम ने रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों और हैदराबाद मंडल की विशेष टीम के सहयोग से की। वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मियों की सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा की।
हवाला का मतलब क्या होता है?
अरबी भाषा से आया यह शब्द “स्थानांतरण” या “विश्वास” का बोधक है। बिना किसी बैंक या आधिकारिक वित्तीय संस्था के माध्यम से एक देश से दूसरे देश में पैसा भेजने की अनौपचारिक प्रणाली को हवाला कहते हैं। इसमें दो दलाल (हवालादार) आपस में विश्वास के आधार पर लेनदेन करते हैं। भारत में यह पूरी तरह अवैध है और FEMA तथा PMLA कानून के तहत दंडनीय अपराध है।
हवाला कांड क्या होता है?
जब हवाला नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध धन का लेनदेन पकड़ा जाता है तो उसे हवाला कांड कहते हैं। भारत का सबसे चर्चित हवाला कांड 1991 में जैन हवाला कांड था जिसमें कई बड़े नेता, नौकरशाह और व्यापारी शामिल थे। इसमें करोड़ों रुपये आतंकवादी संगठनों तक पहुंचाने के आरोप थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए CBI जांच के आदेश दिए थे।
हवाला क्या है?
बैंकिंग व्यवस्था से बाहर काम करने वाली यह एक समानांतर वित्तीय प्रणाली है। इसमें एक व्यक्ति दलाल को पैसा देता है और दूसरे देश में उसका एजेंट उतनी ही रकम प्राप्तकर्ता को दे देता है। कोई कागजी लेनदेन नहीं होता, केवल विश्वास और कोडवर्ड से काम होता है। इसका उपयोग कर चोरी, काला धन छुपाने, आतंकवाद की फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता है।
हवाला का पैसा कहां से आता है?
मुख्यतः अवैध स्रोतों से यह पैसा आता है — जैसे ड्रग तस्करी, भ्रष्टाचार, टैक्स चोरी, आतंकी फंडिंग और रिश्वत। इसके अलावा कुछ व्यापारी आयात-निर्यात में ओवर-इनवॉइसिंग करके भी हवाला के जरिए विदेश में पैसा भेजते हैं। राजनेता और बड़े व्यापारी काला धन छुपाने के लिए इस नेटवर्क का उपयोग करते हैं। अनुमान है कि भारत में हर साल हजारों करोड़ रुपये हवाला के जरिए देश से बाहर जाते हैं।
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