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Hyderabad : चार दशकों बाद माओवाद के पतन का दौर देखने को मिल रहा है – पुलिस महानिदेशक

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: May 18, 2026 • 9:39 PM
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हैदराबाद। तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) सी. वी. आनंद ने स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (SIB) का दौरा कर अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ बैठक की। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (इंटेलिजेंस) विजय कुमार तथा आईजीपी इंटेलिजेंस एवं एसआईबी कार्तिकेय भी मौजूद रहे। दौरे के दौरान डीजीपी ने तेलंगाना में वर्तमान माओवादी गतिविधियों की समीक्षा करते हुए एसआईबी द्वारा चलाए जा रहे एंटी-एक्सट्रीमिस्ट अभियानों और खुफिया पहलों का आकलन किया। उन्होंने राज्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में एसआईबी की भूमिका की सराहना की। डीजीपी ने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई तथा भूमिगत भाकपा (माओवादी) कैडरों के बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण कराने में एसआईबी अधिकारियों और कर्मचारियों के निरंतर प्रयासों की प्रशंसा की।

माओवाद विरोधी अभियान में एसआईबी की सराहना

वर्ष 2024 से 2026 के बीच तेलंगाना में कुल 820 भूमिगत माओवादी कैडरों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इनमें केंद्रीय समिति सदस्य (सीसीएम) 04, राज्य समिति सदस्य (एससीएम) 22, क्षेत्रीय समिति सदस्य (आरसीएम) 01, डिविजनल कमेटी सदस्य (डीवीसीएम) 45 तथा एरिया कमेटी सदस्य (एसीएम) 173 शामिल हैं। इन आत्मसमर्पणों के दौरान कुल 334 हथियार भी जमा कराए गए, जिनमें 58 एके-47 राइफलें, 48 इंसास राइफलें, 50 एसएलआर, 06 एलएमजी तथा अन्य अत्याधुनिक हथियार शामिल हैं। डीजीपी ने कहा कि एसआईबी ने खुफिया आधारित अभियानों, विश्वास निर्माण उपायों और पुनर्वास पहलों के माध्यम से तेलंगाना में सशस्त्र माओवादी आंदोलन को प्रभावी रूप से कमजोर करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

एसआईबी की सक्रिय भूमिका की सराहना

उन्होंने विशेष रूप से भूमिगत माओवादी कैडरों को हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रेरित करने में एसआईबी की सक्रिय भूमिका की सराहना की। उन्होंने आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों के पुनर्वास एवं सामाजिक पुनर्स्थापन की समीक्षा भी की और आश्वासन दिया कि तेलंगाना पुलिस विभाग उनके पुनर्वास और समाज में पुनः एकीकरण के लिए हरसंभव सहायता जारी रखेगा। डीजीपी ने कहा कि एसआईबी को आत्मसमर्पण कर चुके कैडरों पर लगातार नजर रखनी चाहिए तथा उनके कौशल विकास, रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण, नौकरी उपलब्ध कराने और समाज में समुचित पुनर्वास एवं एकीकरण सुनिश्चित करना चाहिए।

चार दशकों बाद माओवाद के पतन का दौर देखने को मिल रहा

बदलते सुरक्षा परिदृश्य पर अधिकारियों को संबोधित करते हुए डीजीपी ने कहा कि चार दशकों बाद माओवाद के पतन का दौर देखने को मिल रहा है। ऐसे में एसआईबी को उभरती चुनौतियों के अनुरूप खुद को ढालते हुए पुलिसिंग इंटेलिजेंस में व्यापक भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, बदलते सामाजिक व्यवहार और युवाओं पर उसके प्रभाव का गंभीर अध्ययन कर सार्वजनिक शांति एवं कानून व्यवस्था पर पड़ने वाले असर को समझना आवश्यक है, ताकि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

माओवादी का अर्थ क्या होता है?

माओ त्से तुंग के विचारों और राजनीतिक सिद्धांतों से प्रभावित विचारधारा को माओवाद कहा जाता है। इस विचारधारा में सशस्त्र संघर्ष और ग्रामीण क्षेत्रों से राजनीतिक परिवर्तन की बात की जाती है। माओवादी शब्द उन लोगों या संगठनों के लिए इस्तेमाल होता है, जो इन सिद्धांतों का समर्थन करते हैं। यह विचारधारा चीन की कम्युनिस्ट क्रांति से जुड़ी मानी जाती है। अलग-अलग देशों में इसके स्वरूप और गतिविधियों में अंतर देखने को मिलता है। भारत में यह शब्द अक्सर नक्सली आंदोलन से जोड़ा जाता है।

भारत में माओवादी क्या हैं?

भारत में माओवादी ऐसे उग्रवादी समूहों को कहा जाता है, जो सरकार के खिलाफ सशस्त्र आंदोलन चलाने के आरोपों में शामिल रहे हैं। ये संगठन मुख्य रूप से जंगल और दूरदराज के इलाकों में सक्रिय रहे हैं। सरकार इन्हें आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती मानती है। कई क्षेत्रों में सुरक्षा बलों और माओवादी समूहों के बीच हिंसक घटनाएं भी हुई हैं। इनका संबंध भूमि, आदिवासी अधिकार और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों से भी जोड़ा जाता है। भारतीय कानून के तहत कई माओवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया है।

क्या भारत में माओवाद अवैध है?

भारत में केवल किसी विचारधारा पर चर्चा करना अपने आप में अवैध नहीं माना जाता, लेकिन हिंसा, हथियारबंद गतिविधियों और प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ी गतिविधियां कानून के तहत अपराध हैं। सरकार ने कई माओवादी संगठनों को गैरकानूनी घोषित किया है। गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत ऐसे संगठनों की सदस्यता, सहायता या हिंसक गतिविधियों में शामिल होना दंडनीय हो सकता है। सुरक्षा एजेंसियां देश के विभिन्न हिस्सों में उग्रवाद रोकने के लिए अभियान चलाती रहती हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जाती है।

माओवादी लोग कौन थे?

यह शब्द उन लोगों और समूहों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो माओवाद नामक राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित थे। इनका संबंध चीन के नेता माओ त्से तुंग के सिद्धांतों से माना जाता है। भारत में कई उग्रवादी संगठनों ने इसी विचारधारा को अपनाकर आंदोलन चलाए। कुछ समूह सामाजिक और आर्थिक बदलाव की मांग करते थे, जबकि कई पर हिंसक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे। समय के साथ सरकार ने सुरक्षा अभियानों और विकास योजनाओं के जरिए इन गतिविधियों को नियंत्रित करने की कोशिश की है।

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