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Telangana : भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन तेज – कविता

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: April 16, 2026 • 4:45 PM
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हैदराबाद। तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता ने विकाराबाद में आरडीओ कार्यालय (Office) के सामने बड़े विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए सरकार के भूमि अधिग्रहण के फैसले के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। यह प्रदर्शन प्रस्तावित पारिगी औद्योगिक कॉरिडोर के लिए छोटे और सीमांत किसानों की जमीन अधिग्रहण के विरोध में आयोजित किया गया। के. कविता ने कहा कि कांग्रेस सरकार किसानों के साथ गंभीर अन्याय कर रही है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि औद्योगिक विकास (Development) के नाम पर कमजोर वर्गों के किसानों की आजीविका छीनी जा रही है।

नीतियां अंततः जनता द्वारा खारिज कर दी जाएंगी

उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी नीतियां अंततः जनता द्वारा खारिज कर दी जाएंगी। उन्होंने बताया कि कल्लापुर, रापोले और भटला चंदराम जैसे गांवों में बड़े पैमाने पर कृषि भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे किसान परेशान हैं। कविता ने कहा कि प्रस्तावित 1,250 एकड़ भूमि में से लगभग 1,000 एकड़ असाइनमेंट भूमि है, जबकि शेष 250 एकड़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के किसानों की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े भू-स्वामियों को छोड़कर कमजोर वर्गों को निशाना बना रही है।

उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि किसानों की समस्याएं जैसे रैतू भरोसा, कर्जमाफी, यूरिया की कमी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) अब भी अनसुलझे हैं। साथ ही उन्होंने पर्यावरणीय मुद्दों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर मूसी नदी की सफाई की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर पास में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।

भूमि अधिग्रहण में मुआवजा कितना मिलता है?

मुआवजे की राशि जमीन के बाजार मूल्य, स्थान और उपयोग पर निर्भर करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार मूल्य का 2 से 4 गुना तक और शहरी क्षेत्रों में लगभग 1 से 2 गुना तक मुआवजा दिया जा सकता है। इसके साथ ही पुनर्वास और पुनर्स्थापन (R&R) का लाभ भी मिलता है। यह प्रावधान भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुनर्स्थापन अधिनियम 2013 के तहत तय किया गया है।

नया भूमि अधिग्रहण कानून क्या है?

भारत में नया भूमि अधिग्रहण कानून भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुनर्स्थापन अधिनियम 2013 है। इस कानून का उद्देश्य किसानों और जमीन मालिकों को उचित मुआवजा देना और उनकी सहमति सुनिश्चित करना है। इसमें सामाजिक प्रभाव आकलन (Social Impact Assessment) और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि प्रभावित लोगों के अधिकार सुरक्षित रहें।

भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया क्या है?

सरकार द्वारा किसी सार्वजनिक परियोजना के लिए जमीन लेने की प्रक्रिया को भूमि अधिग्रहण कहा जाता है। इसमें सबसे पहले सामाजिक प्रभाव का आकलन किया जाता है, फिर जमीन मालिकों को नोटिस दिया जाता है। इसके बाद मुआवजा तय किया जाता है और सहमति ली जाती है। अंत में भुगतान और पुनर्वास की व्यवस्था की जाती है। यह पूरी प्रक्रिया भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुनर्स्थापन अधिनियम 2013 के अनुसार होती है।

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