हैदराबाद। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने प्रमुख संस्थान नेशनल एनिमल रिसोर्स फैसिलिटी फॉर बायोमेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर-एनएआरएफबीआर) का नाम बदलकर अब नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर प्री-क्लिनिकल रिसर्च कर दिया है। यह संस्थान हैदराबाद के जीनोम वैली में स्थित है और अब यह प्री-क्लिनिकल रिसर्च के क्षेत्र में एक व्यापक केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
आईसीएमआर के अनुसार, यह बदलाव भारत में दवा खोज, चिकित्सा तकनीक और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पहले इसे मुख्य रूप से एक विशेष पशु संसाधन केंद्र के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब इसे ट्रांसलेशनल (Translational) साइंस और प्री-क्लिनिकल रिसर्च के एक समग्र हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह संस्थान लैब में हुई खोजों और मानव क्लिनिकल ट्रायल्स के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम करेगा। यहाँ दवाओं, वैक्सीन, बायोलॉजिकल उत्पादों, मेडिकल डिवाइसेस और सेल व जीन थेरेपी के परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
ICMR का मुख्यालय कहाँ है?
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। यह भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है। यहां से देशभर में चल रहे बायोमेडिकल और स्वास्थ्य संबंधी शोध कार्यों का संचालन और निगरानी की जाती है। यह संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा अनुसंधान को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत में ICMR का प्रमुख कौन है?
आईसीएमआर का प्रमुख महानिदेशक होता है। वर्तमान में इसके प्रमुख डॉ. राजीव बहल हैं। वे संगठन के वैज्ञानिक और प्रशासनिक कार्यों का नेतृत्व करते हैं। उनका काम देश में स्वास्थ्य अनुसंधान को बढ़ावा देना, नई नीतियां बनाना और बीमारियों से निपटने के लिए शोध कार्यों का मार्गदर्शन करना होता है।
भारत में कितनी रिसर्च लैब हैं?
आईसीएमआर के अंतर्गत लगभग 25 से अधिक राष्ट्रीय स्तर की रिसर्च लैब और संस्थान कार्य कर रहे हैं। ये लैब विभिन्न बीमारियों, जैसे कैंसर, टीबी, मलेरिया और वायरल संक्रमणों पर शोध करते हैं। ये संस्थान देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित हैं और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार अनुसंधान करते रहते हैं।
भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद क्या है?
ICMR भारत की शीर्ष बायोमेडिकल रिसर्च संस्था है। यह संगठन मानव स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान करता है और नई चिकित्सा तकनीकों के विकास में मदद करता है। इसका उद्देश्य बीमारियों की रोकथाम, उपचार और नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक आधार तैयार करना है, ताकि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके।
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