Nizam Club election delay : में चुनाव चार महीने से अधिक समय तक टलने के बाद सत्ता संघर्ष गहरा गया है। 140 साल के इतिहास में यह केवल दूसरी बार है जब चुनावों में इतनी देरी हुई है। इसके चलते क्लब का प्रशासन लगभग ठप हो गया है और सदस्यों के बीच गंभीर मतभेद उभर आए हैं।
विवाद की शुरुआत जून 2025 में हुई एक असाधारण आम बैठक (EGM) से हुई, जिसमें शासन सुधारों पर चर्चा होनी थी। प्रस्तावों में नेतृत्व का कार्यकाल चार साल तक सीमित करना और पूर्व अध्यक्षों को निचले पदों पर चुनाव लड़ने से रोकना शामिल था। हालांकि बैठक में भारी हंगामे के कारण मतदान नहीं हो सका और बैठक स्थगित कर दी गई।
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इसके बाद कुछ सदस्यों ने अदालत का रुख किया और (Nizam Club election delay) आरोप लगाया कि मानद सचिव अमरेंदर रेड्डी अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद भी पद पर बने हुए हैं। रेड्डी ने इसे प्रक्रिया से जुड़ा विलंब बताया, लेकिन सिविल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव न होने की स्थिति में सचिव का पद पर बने रहना नियमों के खिलाफ है।
इस गतिरोध का असर क्लब के रोज़मर्रा के कामकाज पर पड़ा है। सदस्यों का आरोप है कि चेक साइनिंग, बैठकों की मंजूरी और भुगतान जैसे कार्य प्रभावित हुए हैं। 1884 में Mehboob Ali Pasha द्वारा स्थापित इस क्लब के 6,200 से अधिक सदस्य हैं। साथ ही, बुनियादी ढांचे के गिरते स्तर को लेकर भी नाराज़गी सामने आ रही है।
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