असली परीक्षा मैदान में विवेक और निर्णय क्षमता की होगी
हैदराबाद। तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू (Bhatti Vikramarka Mallu) ने नवचयनित ग्रुप-1 अधिकारियों से आह्वान किया कि वे सार्वजनिक सेवा में हर फाइल के पीछे छिपे आम नागरिक को कभी न भूलें। उन्होंने कहा कि यह केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि किसी के जीवन को बदलने की क्षमता रखता है। मार्री चेन्ना रेड्डी मानव संसाधन विकास संस्थान (एमसीआरएचआरडी संस्थान) में छह सप्ताह का ग्रुप-1 फाउंडेशन कोर्स (बैच-II) पूरा करने वाले 214 अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रशासन में नैतिक मूल्यों और मानवीय दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया। भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि हर निर्णय किसी किसान की उम्मीद, छात्र के सपने और मरीज के जीवन से जुड़ा होता है, इसलिए अधिकारियों को कानून के दायरे में रहकर मानवीय सोच (Human Thinking) के साथ निर्णय लेने चाहिए।
फाइलों और समीक्षाओं के बीच आम जनता की समस्याओं को नहीं किया जाना चाहिए नजरअंदाज
उन्होंने चेतावनी दी कि फाइलों और समीक्षाओं के बीच आम जनता की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिकारी अपनी बुद्धिमत्ता साबित कर चुके हैं, लेकिन असली परीक्षा मैदान में उनके विवेक और निर्णय क्षमता की होगी। “ईमानदारी, बुद्धिमत्ता से अधिक महत्वपूर्ण है।,” उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों से दबाव या प्रलोभन के आगे न झुकने और नैतिकता के साथ कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार पर जनता का भरोसा तभी बढ़ता है जब अधिकारी निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से कार्य करते हैं। आधुनिक प्रशासन का जिक्र करते हुए उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग को प्रोत्साहित किया, लेकिन स्पष्ट किया कि तकनीक कभी भी मानवीय संवेदनाओं का स्थान नहीं ले सकती।
युवा अधिकारियों की बताई भूमिका अहम
उन्होंने “इंदिरा महिला शक्ति” जैसी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में युवा अधिकारियों की भूमिका अहम बताई। भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि समय पर पेंशन देना या छोटी समस्या का समाधान करना भी सुशासन की नींव को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना का भविष्य केवल सचिवालय में नहीं, बल्कि गांवों और मंडलों में लिए गए फैसलों से तय होता है। उन्होंने अधिकारियों से हर निर्णय लेते समय यह विचार करने को कहा कि क्या वह न्यायसंगत और ईमानदार है। “आपकी पहचान आपकी ईमानदारी से बनेगी।,” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल सत्ता का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य नागरिकों में विश्वास और सम्मान पैदा करना है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही राज्य सरकार
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है, जिसे दान नहीं बल्कि मानव संसाधन में निवेश माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक तेलंगाना को 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अवसर पर एमसीआरएचआरडी की महानिदेशक शांति कुमारी, कोर्स निदेशक अरुण कुमार, उपमुख्यमंत्री के सचिव कृष्ण भास्कर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
तेलंगाना में हिंदुओं की आबादी कितनी है?
कुल जनसंख्या में तेलंगाना में हिंदू समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 85–87 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है। यह आंकड़ा 2011 की जनगणना और विभिन्न अनुमानों पर आधारित है। राज्य में हिंदू धर्म के साथ-साथ इस्लाम और अन्य धर्मों के लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं, जिससे यहां सांस्कृतिक विविधता देखने को मिलती है।
तेलंगाना राज्य का मुख्य भोजन क्या है?
स्थानीय खानपान में तेलंगाना का मुख्य भोजन चावल आधारित होता है। यहां चावल, दाल, सांभर, रसम और मसालेदार सब्जियां प्रमुख रूप से खाई जाती हैं। इसके अलावा हैदराबादी बिरयानी, ज्वार की रोटी और विभिन्न पारंपरिक व्यंजन भी काफी लोकप्रिय हैं, जो इस क्षेत्र की विशेष पहचान बनाते हैं।
तेलंगाना का दूसरा नाम क्या है?
ऐतिहासिक रूप से तेलंगाना को “तेलंगाना” नाम से ही जाना जाता है और इसका कोई आधिकारिक दूसरा नाम नहीं है। हालांकि प्राचीन काल में इस क्षेत्र को “त्रिलिंग देश” या “तेलंग देश” कहा जाता था, जो समय के साथ बदलकर तेलंगाना हो गया।
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