कानून-व्यवस्था पर जोर
हैदराबाद। हैदराबाद पुलिस आयुक्त वी. सी. सज्जनार (V. C. Sajjanar) ने बकरीद पर्व के मद्देनजर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बंजारा हिल्स स्थित टीजीआईसीसीसी में विभिन्न गौ-रक्षा संगठनों के साथ समन्वय बैठक की। बैठक में एहतियाती उपायों और सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त तफसीर इकबाल और एम. श्रीनिवासुलु, संयुक्त पुलिस आयुक्त एन. श्वेता, विभिन्न जोनों के डीसीपी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जिनमें युगा तुलसी फाउंडेशन (Yuga Tulsi Foundation) के कोलिसेट्टी शिवकुमार, लव फॉर काउ फाउंडेशन के ट्रस्टी रिद्धेश जगिदार, भारतीय प्राणी मित्र संघ के जसराज श्रीस्रेमाल, गोवत्स फाउंडेशन के अध्यक्ष मुरली मनोहर पलोड़, गोरक्षक दल के दीपक सिंह, अखिल भारतीय गोसेवा फाउंडेशन के ए. बालकृष्ण, बजरंग दल के श्रीकांत और विश्व हिंदू परिषद के बी. नरसिम्हा मूर्ति प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। पुलिस ने सभी संगठनों से शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की। साथ ही त्योहार के दौरान किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही गई।
बकरा ईद क्यों मनाई जाती है?
इस्लाम धर्म में यह त्योहार पैगंबर इब्राहीम की आस्था और बलिदान की याद में मनाया जाता है। मान्यता है कि अल्लाह के आदेश पर उन्होंने अपने पुत्र को कुर्बान करने की तैयारी दिखाई थी, लेकिन अंत में एक जानवर की कुर्बानी स्वीकार की गई। इसी घटना की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है। इसमें मुसलमान जानवर की कुर्बानी देकर गरीबों में मांस बांटते हैं और त्याग, सेवा तथा भाईचारे का संदेश दिया जाता है।
17 जून को मुसलमानों का कौन सा त्यौहार है?
इस तारीख पर इस्लामी कैलेंडर के अनुसार ईद-उल-अजहा (बकरीद) पड़ सकती है, लेकिन यह हर साल चंद्रमा दिखने पर निर्भर करती है। इसलिए निश्चित तारीख देश और साल के अनुसार बदलती रहती है। यह त्योहार हज यात्रा के समय मनाया जाता है और कुर्बानी की परंपरा से जुड़ा होता है। इसमें नमाज अदा की जाती है और समाज में दान और सहयोग की भावना को बढ़ावा दिया जाता है।
बकरीद का इतिहास क्या है?
ऐतिहासिक रूप से यह त्योहार पैगंबर इब्राहीम की उस घटना से जुड़ा है जब उन्होंने ईश्वर के आदेश पर अपने सबसे प्रिय पुत्र की कुर्बानी देने का निर्णय लिया था। उनकी इस भक्ति और समर्पण को देखकर अल्लाह ने उनके पुत्र की जगह एक जानवर की कुर्बानी स्वीकार की। तभी से यह परंपरा शुरू हुई और हर साल मुसलमान इस दिन कुर्बानी देकर आस्था, त्याग और समर्पण का संदेश याद करते हैं।
बकरा ईद की बधाई कैसे दें?
इस अवसर पर लोग एक-दूसरे को “ईद मुबारक” कहकर शुभकामनाएं देते हैं। इसके साथ शांति, खुशहाली और बरकत की दुआ दी जाती है। कुछ लोग “ईद-उल-अजहा मुबारक” कहकर भी बधाई देते हैं। सोशल मीडिया या व्यक्तिगत रूप से शुभकामनाएं देकर भाईचारे और प्रेम का संदेश फैलाया जाता है। यह दिन मिल-जुलकर खुशी मनाने और जरूरतमंदों की मदद करने की प्रेरणा देता है।
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