मंत्री ने की अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ समीक्षा
हैदराबाद। तेलंगाना सरकार ने कलेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (Project) के तहत आने वाले तीनों प्रमुख बैराज- मेडिगड्डा, अन्नाराम और सुंदिल्ला-की मरम्मत कार्य को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि इन बैराजों को जल्द से जल्द दोबारा चालू करना सरकार की प्राथमिकता है। रविवार को सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में मंत्री ने अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ समीक्षा की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण और अन्य जांच एजेंसियों ने इन बैराजों की नींव, बनावट और निर्माण में गंभीर खामियां पाई हैं, जिन्हें जल्द दूर करना जरूरी है। मंत्री ने निर्देश दिया कि वर्ष 2027 और 2028 को मरम्मत कार्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अन्नाराम और सुंदिल्ला बैराज (Sundilla Barrage) तय समय में पूरी तरह चालू हो जाएंगे, जबकि मेडिगड्डा को आंशिक रूप से शुरू किया जा सकेगा।
विशेषज्ञ संस्थाओं को जिम्मेदारी
सरकार ने नए डिजाइन तैयार करने के लिए विशेषज्ञ संस्थाओं को जिम्मेदारी सौंपी है। मंत्री ने उन्हें दिन-रात काम कर जल्द से जल्द डिजाइन तैयार करने को कहा, ताकि उसे केंद्रीय जल आयोग से तुरंत मंजूरी मिल सके। इसके लिए जरूरी सभी तकनीकी परीक्षण प्राथमिकता के आधार पर पूरे किए जाएंगे। पुणे स्थित केंद्रीय जल एवं ऊर्जा अनुसंधान केंद्र को भी सभी परीक्षण और अध्ययन शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। 45 दिन की परीक्षण अवधि के दौरान विशेषज्ञों को स्थल पर लगातार मौजूद रहने को कहा गया है।
परियोजना की निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय संचालन समिति बनाई गई है, जो सप्ताह में दो बार बैठक कर प्रगति की समीक्षा करेगी। साथ ही, एक अधिकारी रोजाना कार्यों की निगरानी करेगा। मंत्री ने निर्माण कार्य कर रही एजेंसियों को अपने शिविर और सुविधाएं तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि इंजीनियरों और कर्मचारियों को कोई परेशानी न हो। साथ ही, सभी परीक्षण कार्य संबंधित विशेषज्ञों और अधिकारियों की मौजूदगी में कराए जाएंगे और उनका पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। बैठक में सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ भी मौजूद रहे।
कालेश्वरम परियोजना का निर्माण किसने करवाया था?
तेलंगाना राज्य में स्थित कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना का निर्माण राज्य सरकार द्वारा कराया गया। इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई और इसे के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में विकसित किया गया। इसका उद्देश्य गोदावरी नदी के पानी को ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक पहुंचाकर सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराना है। यह दुनिया की सबसे बड़ी बहु-स्तरीय लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं में से एक मानी जाती है।
नर्मदा गंभीर लिंक परियोजना क्या है?
मध्य प्रदेश की एक महत्वपूर्ण सिंचाई योजना है, जिसका उद्देश्य नर्मदा नदी के अतिरिक्त जल को गंभीर नदी में स्थानांतरित करना है। इससे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा बढ़ाई जाती है। इस परियोजना के माध्यम से किसानों को पर्याप्त पानी मिल सकेगा और कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी। यह जल संसाधन प्रबंधन का एक उदाहरण है, जो जल असंतुलन को कम करने में मदद करता है।
तारबंदी योजना में कितने बीघा जमीन होनी चाहिए?
राज्य सरकारों द्वारा चलाई जाने वाली इस योजना का लाभ लेने के लिए न्यूनतम भूमि सीमा तय की जाती है, जो राज्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सामान्यतः किसानों के पास कम से कम 1 से 1.5 बीघा कृषि भूमि होना आवश्यक माना जाता है। इस योजना के तहत खेतों के चारों ओर तारबंदी कर फसलों को आवारा पशुओं से बचाया जाता है, जिससे उत्पादन में सुधार होता है और किसानों की आय बढ़ती है।
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