हैदराबाद। हैदराबाद सिटी पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार (V.C. Sajjanar) ने देश में बढ़ते साइबर अपराध पर चिंता जताते हुए बैंकिंग प्रणाली में अहम सुधारों की आवश्यकता बताई है। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा को पत्र लिखकर संगठित साइबर गिरोहों पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम उठाने की सिफारिश की है। आयुक्त ने बताया कि ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ जांच के दौरान यह सामने आया कि निर्दोष लोगों के नाम पर खोले गए ‘म्यूल अकाउंट’ साइबर ठगी का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। इस जांच में केवाईसी (KYC) प्रक्रिया में गंभीर खामियां और लापरवाही उजागर हुई हैं।
केवाईसी नियमों के पालन की व्यापक ऑडिट कराने की मांग
सज्जनार ने आरबीआई से सभी बैंकों को सख्त निर्देश जारी करने, शाखा स्तर पर जवाबदेही तय करने और केवाईसी नियमों के पालन की व्यापक ऑडिट कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में बैंक कर्मचारी भी साइबर अपराधियों के साथ मिलीभगत कर रहे हैं। महाराष्ट्र के नासिक स्थित एक निजी बैंक शाखा का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एक कर्मचारी ने अवैध रूप से सहकर्मी के क्रेडेंशियल का उपयोग कर म्यूल अकाउंट बनाए। पत्र में निजी बैंकों में ऐसी अनियमितताओं की अधिकता पर भी चिंता जताई गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि साइबर अपराध में संलिप्त पाए गए या आरोपपत्रित बैंक अधिकारियों की जानकारी आरबीआई को दी जाए और उन्हें स्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट किया जाए।
आरबीआई, बैंकों और पुलिस के प्रतिनिधियों का संयुक्त कार्यबल बनाने का प्रस्ताव
साइबर अपराध से निपटने के लिए उन्होंने आरबीआई, बैंकों और पुलिस के प्रतिनिधियों का संयुक्त कार्यबल (जॉइंट वर्किंग ग्रुप) बनाने का प्रस्ताव भी रखा है, जो म्यूल अकाउंट्स पर नियमित निगरानी रखे। साथ ही बैंकों को रियल-टाइम में संदिग्ध लेनदेन पहचानने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया। आयुक्त ने आम जनता से भी सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अधिक लाभ का झांसा देने वाले विज्ञापनों से बचने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ या ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर पैसे की मांग नहीं करती।
कमीशन के लिए बैंक खाते किराए पर देना गैरकानूनी
सज्जनार ने लोगों को चेतावनी दी कि कमीशन के लिए बैंक खाते किराए पर देना गैरकानूनी है और ऐसे खातों से होने वाले अपराधों की जिम्मेदारी खाताधारक की ही होगी। उन्होंने साइबर ठगी के शिकार लोगों से ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर टोल-फ्री नंबर 1930 पर कॉल करने या www.cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की।
साइबर क्राइम में शिकायत कैसे करें?
ऑनलाइन ठगी या डिजिटल अपराध होने पर सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके तुरंत मदद ली जा सकती है। नजदीकी पुलिस थाने या साइबर सेल में भी लिखित शिकायत दी जा सकती है। शिकायत करते समय स्क्रीनशॉट, बैंक डिटेल, ट्रांजैक्शन आईडी जैसे सबूत देना जरूरी होता है, जिससे जांच में तेजी आती है।
साइबर क्राइम में कौन सी धारा लगती है?
डिजिटल अपराधों में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की विभिन्न धाराएं लागू होती हैं, जैसे धारा 43 (अनधिकृत एक्सेस), 66 (हैकिंग), 66C (पहचान की चोरी) और 66D (ऑनलाइन धोखाधड़ी)। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धाराएं भी लग सकती हैं, जैसे 419 (छल), 420 (धोखाधड़ी) आदि, जो अपराध की प्रकृति पर निर्भर करती हैं।
साइबर अपराध के 5 प्रकार क्या हैं?
मुख्य रूप से साइबर अपराध के पांच प्रकार होते हैं—हैकिंग, फिशिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, पहचान की चोरी (Identity Theft) और साइबर स्टॉकिंग। हैकिंग में सिस्टम को अनधिकृत रूप से एक्सेस किया जाता है, फिशिंग में नकली लिंक या ईमेल से जानकारी ली जाती है, जबकि ऑनलाइन धोखाधड़ी में पैसों की ठगी की जाती है। ये अपराध इंटरनेट के माध्यम से किए जाते हैं और तेजी से बढ़ रहे हैं।
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