हैदराबाद। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी (Chief Minister Revanth Reddy) ने गुरुवार को आईसीसीसी में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री के सलाहकार वेनम नरेंद्र रेड्डी, सरकारी सलाहकार के. केशवराव, सीएमओ मुख्य सचिव शेषाद्री, मुख्यमंत्री विशेष सचिव अजित रेड्डी, शिक्षा आयोग के अध्यक्ष आकुनूरी मुरली, उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. बालकृष्णा रेड्डी, शिक्षा विभाग सचिव योगिता राणा, कॉलेज शिक्षा विभाग कमिश्नर देवसेन, उस्मानिया विश्वविद्यालय वीसी प्रो. कुमार, और अंबेडकर विश्वविद्यालय वीसी प्रो. घंता चक्रपाणी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने बैठक में शिक्षा सुधार और छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाओं पर जोर देते हुए कई अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोर अर्बन रीज़न में सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति सुधारने पर विशेष ध्यान दिया जाए। इंटीग्रेटेड स्कूलों के निर्माण के लिए कोई समझौता न करें। भारतीय शिक्षा भवन (Bharatiya Shiksha Bhavan) और जूबीली हिल्स पब्लिक स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएँ सरकारी स्कूलों में भी उपलब्ध कराई जाएं।
एआई तकनीक का किया जाए उपयोग
सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में ब्रेकफास्ट स्कीम को पुख्ता ढंग से लागू किया जाए। ब्रेकफास्ट स्कीम में दूध अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए और इसकी आपूर्ति विजया डायरी के माध्यम से सुनिश्चित की जाए। दोपहर के भोजन की गुणवत्ता सुधारने के लिए एआई तकनीक का उपयोग किया जाए। कोर अर्बन रीज़न के बाहर, हर एक मंडल में पायलट प्रोजेक्ट के तहत ‘आरुट्ल स्कूल’ जैसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें परिवहन सहित सभी सुविधाएँ उपलब्ध हों। सरकारी स्कूलों में छात्रों के परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक बसों की स्थापना पर अध्ययन किया जाए।

निजी स्कूलों में नियमों से अधिक फीस वसूलने पर अनुमति रद्द और रिकवरी की कार्रवाई की जाए। निजी स्कूलों में फीस नियंत्रण संबंधी सिफारिशें जनता की राय के लिए वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिक्षा सुधार केवल कागज़ों पर न रहे, बल्कि छात्रों तक समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
एआई तकनीक क्या होती है?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता ऐसी उन्नत तकनीक है, जिसके माध्यम से कंप्यूटर और मशीनें मानव जैसी सोच, सीखने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करती हैं। इसमें मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, रोबोटिक्स और नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसी शाखाएं शामिल हैं। यह तकनीक स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, सुरक्षा और उद्योग जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से उपयोग की जा रही है।
AI का जनक कौन था?
इस क्षेत्र के जनक के रूप में John McCarthy का नाम लिया जाता है। उन्होंने 1956 में “Artificial Intelligence” शब्द का प्रयोग किया और डार्टमाउथ सम्मेलन का आयोजन किया, जिससे इस विषय को औपचारिक पहचान मिली। उनके योगदान के कारण उन्हें एआई का पिता कहा जाता है।
AI इंजीनियर की सैलरी कितनी होती है?
वेतन अनुभव, कंपनी और देश पर निर्भर करता है। भारत में शुरुआती स्तर पर एआई इंजीनियर की सैलरी लगभग ₹6–10 लाख प्रति वर्ष हो सकती है। 3–5 साल के अनुभव के बाद यह ₹15–25 लाख या उससे अधिक तक पहुंच सकती है। बड़ी टेक कंपनियों में विशेषज्ञ स्तर पर वार्षिक पैकेज और भी अधिक होता है।
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