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Hyderabad : राजस्व विभाग में क्रांतिकारी सुधार शुरू किए गए – पोंगुलेटी

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: April 2, 2026 • 11:33 AM
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अब किसानों को ‘मी सेवा’ केंद्रों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं

हैदराबाद। राज्य में भूमि विवादों का स्थायी समाधान करने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री (CM) रेवंत रेड्डी के मार्गदर्शन में राजस्व विभाग में क्रांतिकारी सुधार शुरू किए गए हैं। यह बात राज्य के राजस्व, हाउसिंग एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने कही। उन्होंने बताया कि किसानों को पारदर्शी और सरल सेवाएं प्रदान करने के लिए भूमि, सर्वे और पंजीकरण विभागों को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाते हुए इंटीग्रेटेड ‘भूभारती पोर्टल’ तैयार किया गया है। इस पोर्टल को 2 अप्रैल से पांच मंडलों में प्रायोगिक रूप से लागू किया जाएगा। मंत्री ने केरल दौरे के दौरान राजस्व अधिकारियों के साथ टेलीकॉन्फ्रेंस (Teleconference) के जरिए समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पोर्टल को किसान-केंद्रित बनाते हुए आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।

‘मी सेवा’ केंद्रों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं

उन्होंने बताया कि खम्मम जिले के कुसुमंची, भद्राद्रि कोत्तागुडेम जिले के अश्वारावपेट, रंगारेड्डी जिले के अमंगल, संगारेड्डी जिले के वटपल्ली और नारायणपेट जिले के कोसगी मंडलों में इसे लागू किया जाएगा। अब किसानों को ‘मी सेवा’ केंद्रों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। वे अपने घर बैठे स्मार्टफोन के माध्यम से भूमि संबंधी सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे। पोर्टल में लॉगिन करते ही किसान को उसकी भूमि का पूरा विवरण दिखाई देगा। आवश्यक सर्वे के लिए आवेदन करने पर फीस की जानकारी मिलेगी और भुगतान के बाद संबंधित लाइसेंस प्राप्त सर्वेयर को सूचना भेजी जाएगी। दो दिनों के भीतर पड़ोसी किसानों को नोटिस जारी किए जाएंगे और सात दिनों के भीतर सर्वे की तिथि तय की जाएगी। इसके बाद आधुनिक रोवर तकनीक के माध्यम से सर्वे पूरा किया जाएगा और विवरण सिस्टम में दर्ज होगा।

आवेदक किसान को एलपीएम और भूधार नंबर किए जाएंगे आवंटित

मंडल सर्वेयर की जांच और तहसीलदार की स्वीकृति के बाद आवेदक किसान को एलपीएम और भूधार नंबर आवंटित किए जाएंगे, जो पोर्टल में भी दर्ज रहेंगे। सर्वे पूरा होने के बाद सर्वे मैप जनरेट कर पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। आवेदन की शुरुआत से लेकर पूर्ण होने तक हर चरण में नागरिकों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस अलर्ट भेजे जाएंगे। भूभारती कानून के तहत कृषि भूमि के पंजीकरण के समय सर्वे मैप को अनिवार्य रूप से जोड़ा जाएगा।

प्रत्येक सर्वे मैप को एक यूनिक नंबर और प्रत्येक सर्वे नंबर को आधार की तरह भूधार नंबर दिया जाएगा। पुराने सर्वे उपकरणों की जगह आधुनिक रोवर तकनीक अपनाने से सर्वे प्रक्रिया तेज और अधिक सटीक होगी। मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने कहा कि भूमि संबंधी समस्याएं किसानों के जीवन में बड़ी बाधा रही हैं। ‘भूभारती पोर्टल’ इन समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और यह राजस्व व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन की शुरुआत साबित होगा।

राजस्व विभाग में क्या-क्या होता है?

सरकारी व्यवस्था का यह हिस्सा भूमि, कर और सरकारी आय से जुड़े कार्यों को संभालता है। इसमें जमीन का रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी), भूमि मापन, नामांतरण (म्यूटेशन), स्टांप और रजिस्ट्रेशन, तथा कर वसूली जैसे काम शामिल होते हैं। इसके अलावा आपदा राहत, जमीन विवाद का समाधान और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी यह विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राजस्व विभाग का अर्थ क्या है?

सरकार की आय (Revenue) से संबंधित सभी कार्यों को संभालने वाले विभाग को राजस्व विभाग कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य कर वसूली, भूमि प्रबंधन और सरकारी संपत्तियों का सही रिकॉर्ड रखना होता है। यह विभाग राज्य और जिला स्तर पर काम करता है और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

राजस्व विभाग में कौन-कौन आता है?

इस विभाग में कई अधिकारी और कर्मचारी शामिल होते हैं, जैसे जिलाधिकारी (DM), उपजिलाधिकारी (SDM), तहसीलदार, नायब तहसीलदार और लेखपाल। ये सभी मिलकर जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, कर वसूली, प्रमाण पत्र जारी करने और कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रशासनिक कार्यों को संभालते हैं। प्रत्येक अधिकारी की अपनी अलग जिम्मेदारी होती है, लेकिन सभी का उद्देश्य प्रशासन को सुचारु रखना होता है।

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