सीएम ने ‘अराइव अलाइव’ अभियान के लिए पुलिस को किया सम्मानित
हैदराबाद। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी (Chief Minister Revanth Reddy) ने सोमवार को यूसुफगुड़ी में आयोजित ”अराइव अलाइव (Arrive Alive ) – ए कैंपेन फॉर सेफर रोड्स इन तेलंगाना” कार्यक्रम का उद्घाटन किया और सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में पुलिस विभाग की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएँ समाज के लिए अत्यंत गंभीर समस्या बन चुकी हैं और राज्य सरकार इसे रोकने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि देश में हर मिनट सड़क दुर्घटना हो रही है और युद्धों में सिपाहियों की तुलना में सड़क पर अधिक लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि कई प्रमुख व्यक्तियों ने अपने बच्चों को सड़क हादसों में खोया है। उन्होंने छात्रों के स्तर से ही ट्रैफिक नियमों पर जागरूकता पैदा करने का महत्व बताया।
पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा
रेवंत रेड्डी ने कहा कि समाज में अपराध के स्वरूप बदलने के साथ पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है। साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए विशेष प्रणाली बनाई गई है और ड्रग्स की समस्या को समय रहते पहचानने के लिए ‘ईगल फोर्स’ का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना पुलिस ने गांजा और अन्य मादक पदार्थों पर नियंत्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि तालाबों, नालों और जल निकासी संरचनाओं की सुरक्षा के लिए ‘हाइड्रा’ इकाई बनाई गई है और इनकी पुनरुद्धार गतिविधियाँ चल रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ट्रैफिक व्यवस्था अराजक है और इसे तकनीकी दक्षता के साथ सुदृढ़ बनाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों से चालान सीधे उनके खातों से कटे, ऐसी व्यवस्था लागू करने की भी आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध, ड्रग्स और हत्या की तुलना में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन अब सबसे बड़ी समस्या बन गई है और इसे प्राथमिकता के साथ नियंत्रित किया जाएगा।
जनता द्वारा आगे बढ़ाया जाने वाला अभियान
कार्यक्रम में उपस्थित मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने कहा कि रोड सेफ्टी सप्ताह के तहत विभिन्न गतिविधियाँ चल रही हैं। डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी ने कहा कि ‘अराइव अलाइव’ सिर्फ जागरूकता कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह जनता द्वारा आगे बढ़ाया जाने वाला अभियान है। उन्होंने बताया कि तेलंगाना में लगभग 30,000 किलोमीटर सड़क नेटवर्क है, जहाँ हर साल करीब 27,000 सड़क हादसे होते हैं और लगभग 7,500 लोग अपनी जान गंवाते हैं।
उन्होंने चेताया कि 2025 में हत्याओं की संख्या 800 थी, जबकि सड़क हादसों में 7,500 लोग मरे, यानी सड़क हादसे हत्याओं की तुलना में 9-10 गुना ज्यादा जान ले रहे हैं। डीजीपी ने बताया कि ‘गोल्डन अवर’ में पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने की ट्रेनिंग की वजह से पिछले साल मृत्यु दर में कमी आई है। उन्होंने कहा कि सड़क किनारे दुकानों, होटलों और रेस्तरां के कर्मचारियों को प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग दी जा रही है। फिर भी, मृतकों में 75–80 प्रतिशत मोटरसाइकिल चालक और पैदल यात्री हैं, जो चिंता का विषय है। अधिकतर 20–40 वर्ष के लोग अपनी जान खो रहे हैं, जो देश की विकास क्षमता पर असर डालता है।
सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण क्या है?
तेज रफ्तार को सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। इसके अलावा ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, शराब या नशे में वाहन चलाना, मोबाइल फोन का इस्तेमाल, गलत ओवरटेकिंग, खराब सड़कें और वाहन की तकनीकी खराबी भी दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ाती हैं। हेलमेट और सीट बेल्ट न पहनना चोट और मृत्यु के खतरे को और गंभीर बना देता है।
एक्सीडेंट करने पर कौन सी धारा लगती है?
दुर्घटना की स्थिति और गंभीरता के आधार पर अलग-अलग धाराएं लगती हैं। सामान्य लापरवाही पर भारतीय दंड संहिता की धारा 279 (लापरवाह वाहन चलाना) लागू होती है। चोट लगने पर 337 या 338 और मृत्यु होने पर 304A (लापरवाही से मृत्यु) लग सकती है। साथ ही मोटर वाहन अधिनियम के तहत भी कार्रवाई होती है।
एक्सीडेंट की रिपोर्ट कैसे लिखें?
घटना की सही तारीख, समय और स्थान का उल्लेख करके रिपोर्ट लिखी जाती है। इसमें वाहन नंबर, चालक का नाम, घायल या मृत व्यक्ति का विवरण, प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी और दुर्घटना का संक्षिप्त विवरण शामिल किया जाता है। नजदीकी पुलिस थाने में लिखित शिकायत या एफआईआर दर्ज कराई जाती है। फोटो और मेडिकल रिपोर्ट संलग्न करना उपयोगी होता है।
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