हैदराबाद। पंचायती राज मंत्री सीतक्का (Panchayati Raj Minister Seethakka) ने सोमवार को अपने कार्यालय में ट्राइबल पुलिस बटालियन से संबंधित मामलों पर पुलिस महानिदेशक (DGP) बी. शिवधर रेड्डी के साथ बैठक की। इस अवसर पर विधायक कोरम कनकय्या, तेल्लम वेंकट राव और जारे आदि नारायण भी उपस्थित रहे। बैठक में सत्तुपल्ली में स्थित ट्राइबल पुलिस बटालियन के कर्मचारियों द्वारा सामना की जा रही विभिन्न समस्याओं पर चर्चा हुई। मंत्री और विधायक दल ने नए नियुक्तियों, पदोन्नति, स्थानीयता और तबादलों से जुड़ी समस्याओं को डीजीपी के सामने रखा। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों के कारण आदिवासी युवाओं के साथ-साथ पुलिस कर्मचारियों को भी परेशानी हो रही है।
नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक
मंत्री सीतक्का ने स्पष्ट किया कि ट्राइबल पुलिस बटालियन को सशक्त बनाने के लिए कर्मचारियों को नियुक्ति, पदोन्नति, स्थानांतरण और नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी ने बैठक में सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए आश्वासन दिया कि ट्राइबल पुलिस बटालियन से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के साथ देखा जाएगा और आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। इसके अलावा, मंत्री सीतक्का ने जल्द ही होने वाले मेडारम महा जातरा के लिए सुरक्षा इंतजामों पर भी डीजीपी से चर्चा की।
की जानी चाहिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
उन्होंने कहा कि लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए। बैठक के अंत में मंत्री सीतक्का ने डीजीपी को मेडारम महा जातरा का आमंत्रण पत्र सौंपा और पुलिस परिवारों सहित सभी को महा जातरा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आदिवासी परंपराओं और तेलंगाना संस्कृति का प्रतीक होने के नाते इस महा जातरा में हर व्यक्ति को भाग लेना चाहिए।
आरक्षी पुलिस क्या है?
सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियुक्त किए गए पुलिस बल के निचले स्तर के कर्मचारियों को आरक्षी कहा जाता है। इनका मुख्य कार्य गश्त करना, भीड़ नियंत्रण, अपराध रोकथाम, प्राथमिकी दर्ज करने में सहायता और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना होता है। आम भाषा में इन्हें सिपाही या कांस्टेबल भी कहा जाता है।
पुलिस का असली नाम क्या था?
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में संगठित पुलिस व्यवस्था की शुरुआत हुई थी। उस समय इसे “इंडियन पुलिस” के नाम से जाना जाता था। 1861 के पुलिस अधिनियम के तहत आधुनिक पुलिस प्रणाली विकसित की गई, जिसने वर्तमान पुलिस ढांचे की नींव रखी।
पुलिस को शुद्ध हिंदी में क्या कहते हैं?
शुद्ध हिंदी में पुलिस के लिए “रक्षक बल” या “आरक्षा बल” शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा “कानून रक्षक” और “सुरक्षा बल” जैसे शब्द भी हिंदी साहित्य और सरकारी भाषा में उपयोग किए जाते हैं।
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