Big Festival : सम्मक्का–सरलम्मा जातरा देश का सबसे बड़ा जनजातीय पर्व – जुएल ओराम

Read Time:  1 min
जातरा
जातरा
FONT SIZE
GET APP

केंद्रीय मंत्रियों ने मेडारम मंदिर में दर्शन किए

हैदराबाद। सम्मक्का–सरलम्मा जातरा (Sammakka-Saralamma Jathara) के अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम और केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने गुरुवार को मेदाराम मंदिर में दर्शन कर जनजातीय देवी-देवताओं की पूजा की। तेलंगाना के मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी, दानसरी अनसूया (सीतक्का) और अदलुरी लक्ष्मण कुमार ने मुख्य मंदिर द्वार पर केंद्रीय मंत्रियों का भव्य स्वागत किया। पारंपरिक जनजातीय ढोल-नगाड़ों के बीच उन्हें मंदिर तक ले जाया गया, जहाँ विशेष अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके बाद उन्होंने देवी-देवताओं को निलुवेतु बंगारम (स्वर्ण अर्पण) किया। बाद में मीडिया से बातचीत करते हुए जुएल ओराम (Juel Oram) ने कहा कि सम्मक्का–सरलम्मा जातरा देश का सबसे बड़ा जनजातीय पर्व है और यह जनजातीय समुदायों का महाकुंभ है।

20 वर्ष पहले भी आए थे मेदाराम

उन्होंने बताया कि वे लगभग 20 वर्ष पहले भी मेदाराम आए थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर पुनः यहाँ आकर उन्हें प्रसन्नता हुई है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार इस क्षेत्र के विकास के लिए पूर्ण सहयोग दे रही है। जातरा के सुचारू आयोजन के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनें भी चलाई गई हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी उनके पुराने संसदीय सहयोगी रहे हैं। जनजातीय कल्याण की केंद्रीय योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम विकास अभियान के तहत 1 लाख करोड़, पीएम जनमन योजना के तहत 24,000 करोड़ रुपअ खर्च किए जा रहे हैं तथा तेलंगाना के लिए 23 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं।

जातरा

सम्मक्का–सरलम्मा जैसे पर्वों का पूरा सम्मान करती है सरकार

उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में जनजातीय कार्य मंत्रालय की स्थापना हुई थी और वे इसके पहले कैबिनेट मंत्री रहे। केंद्र सरकार बिरसा मुंडा जैसे महान जनजातीय नेताओं की विरासत और सम्मक्का–सरलम्मा जैसे पर्वों का पूरा सम्मान करती है। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि यह जनजातीय समुदायों का सबसे बड़ा पर्व है, जिसमें लगभग एक महीने तक विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु आते हैं। उन्होंने राज्य मंत्रियों और अधिकारियों की व्यवस्थाओं की सराहना की।

केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कर रही हैं क्षेत्र में विकास कार्य

उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर क्षेत्र में विकास कार्य कर रही हैं—मुलुगु, लखनावरम, मेदाराम, ताड़वाई और बोगाथा जलप्रपातों के पर्यटन विकास के लिए 80 करोड़, रामप्पा मंदिर के विकास के लिए 140 करोड़ तथा इस वर्ष जातरा व्यवस्थाओं के लिए 3.70 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। किशन रेड्डी ने यह भी बताया कि सम्मक्का–सरलम्मा के नाम से 890 करोड़ की लागत से केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है, जिसका कार्य प्रारंभ हो चुका है और प्रधानमंत्री द्वारा शीघ्र उद्घाटन किया जाएगा। केंद्रीय मंत्रियों ने लाखों श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की सराहना की।

मेडाराम जतारा का क्या महत्व है?

तेलंगाना का यह विशाल आदिवासी पर्व सम्मक्का-सारलम्मा देवी की स्मृति में मनाया जाता है। यह अन्याय के खिलाफ आदिवासी संघर्ष, प्रकृति पूजा और सामाजिक समानता का प्रतीक है। इसमें करोड़ों श्रद्धालु भाग लेते हैं और इसे एशिया का सबसे बड़ा जनजातीय मेला माना जाता है।

2026 में मेडाराम जतारा कब था?

यह भव्य उत्सव वर्ष 2026 में जनवरी महीने के अंतिम सप्ताह में आयोजित हुआ था। परंपरागत रूप से यह माघ पूर्णिमा के आसपास चार दिनों तक चलता है। इन दिनों लाखों श्रद्धालु मेदाराम पहुंचकर देवी सम्मक्का और सारलम्मा के दर्शन करते हैं।

तेलंगाना में सबसे बड़ा आदिवासी त्योहार कौन सा है?

सम्मक्का-सारलम्मा मेदाराम जतारा को राज्य का सबसे बड़ा आदिवासी त्योहार माना जाता है। यह प्रत्येक दो वर्ष में आयोजित होता है और इसमें देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। यह त्योहार आदिवासी संस्कृति, आस्था और परंपराओं को जीवित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

Read Telugu News: https://vaartha.com/

यह भी पढ़ें :

Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।