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SHE Teams : शी टीमों ने 11 सौ से अधिक शिकायतें सुलझाईं

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: January 26, 2026 • 12:26 PM
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हैदराबाद । महिला सुरक्षा को लेकर सक्रिय हैदराबाद शी टीमों ने पिछले एक वर्ष में 1,149 शिकायतों का समाधान किया है। विशेष जांच (Investigation)और तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए शहर पुलिस (City Police) की यह टीम 3,826 व्यक्तियों को विभिन्न प्रकार की उत्पीड़न घटनाओं में रंगे हाथ पकड़ने में सफल रही।

कार्रवाई से महिलाओं को समय पर राहत मिली

टीमों की तत्पर कार्रवाई से महिलाओं को समय पर राहत मिली। एक मामले में, एक युवती जिसे अपने दोस्त के साथ साझा की गई निजी तस्वीरों के कारण ब्लैकमेल किया जा रहा था, शी टीमों से संपर्क कर मामले को तुरंत सुलझाने में मदद पाई। एक अन्य पेशेवर महिला, जो लगातार पीछा किए जाने और धमकियों का सामना कर रही थी, को कानूनी सहायता और सुरक्षा प्रदान की गई। 22 वर्षीय एक पीड़िता ने बताया, “मैं हर समय भय में जी रही थी, एक क्लिक से मेरी प्रतिष्ठा और परिवार की इज्जत बर्बाद हो सकती थी। शी टीमों तक पहुँचने के बाद ही मुझे राहत मिली। पुलिस ने न केवल अपराधी को गिरफ्तार किया, बल्कि मेरे मामले को संवेदनशीलता और गोपनीयता के साथ संभाला।”

शी टीमों ने महिला को एक सुरक्षा कवच प्रदान किया

एक अन्य पेशेवर महिला ने साझा किया कि कैसे महीनों तक पीछा और हिंसक धमकियों ने उसके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया। शी टीमों ने उसे एक सुरक्षा कवच प्रदान किया और भय से मुक्त कर उसे आत्मविश्वासी बनाया। विश्लेषण में सामने आया कि साइबर अपराध में वृद्धि हुई है। ब्लैकमेल सबसे आम शिकायत बन गया, जिसमें 366 पीड़ितों ने मदद मांगी। अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल कर महिलाओं को अपने जाल में फंसाते हैं और रिकॉर्ड किए गए वीडियो कॉल या निजी तस्वीरों का दुरुपयोग कर पैसे या यौन संबंधों के लिए दबाव डालते हैं।

82 फर्जी प्रोफाइल एवं आपत्तिजनक सामग्री फैलाने के मामलें हल

पुलिस ने “मनोवैज्ञानिक जासूसी” की घटनाओं में वृद्धि देखी। शी टीमों ने 121 मध्यरात्रि उत्पीड़न मामलों और 82 फर्जी प्रोफाइल एवं आपत्तिजनक सामग्री फैलाने के मामलों को हल किया। 50 से अधिक महिलाओं ने बार-बार अपमानजनक कॉल के कारण मानसिक तनाव की शिकायत की, जिन्हें फोरेंसिक विश्लेषण से ट्रेस किया गया। इसके अलावा, 98 मामलों में विवाह का झांसा देकर महिलाओं का शारीरिक, भावनात्मक और आर्थिक शोषण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया गया और आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की गई।

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