हाइड्रा पर गलत कार्रवाई करने का आरोप
हैदराबाद। तेलंगाना राज्य मानवाधिकार आयोग (Telangana State Human Rights Commission) के अध्यक्ष डा. न्यायमूर्ति शमीम अख्तर ने एपीआर प्रणव एंटिलिया, बाचुपल्ली के निवासियों की शिकायत पर जांच शुरू की। निवासियों का आरोप है कि हैदराबाद डिजास्टर रिस्पॉन्स और संपत्ति सुरक्षा एजेंसी (हाइड्रा) ने 9 मार्च को उनकी सामुदायिक दीवार गिरा दी, जबकि उन्हें नोटिस पर उचित जवाब देने का अवसर नहीं मिला। शिकायत में यह भी कहा गया कि महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया और आवश्यक विद्युत उपकरण हटाने में बाधा डाली गई। आयोग ने मीडिया में फैल रही भ्रामक जानकारी के कारण मानसिक तनाव (Mental Stress) और असुरक्षा की बात उठाई।
सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने को कहा
आयोग ने निवासियों की गरिमा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और तेलंगाना पुलिस महानिदेशक को निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने को कहा। आयोग ने शहर के सड़कों की बिजली आपूर्ति बहाल करने हेतु टीजीएसपीडीसीएल अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक को तकनीकी सहयोग प्रदान करने का आदेश दिया। संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए गए हैं और मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को तय की गई है।
तेलंगाना के वर्तमान मानवाधिकार आयुक्त कौन है?
Telangana State Human Rights Commission के वर्तमान अध्यक्ष (चेयरमैन) Justice G. Chandraiah हैं। वे पहले आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रह चुके हैं। मानवाधिकार आयोग का काम राज्य में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना और अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की जांच करना होता है। आयोग लोगों की शिकायतें सुनकर उचित कार्रवाई की सिफारिश भी करता है।
मानवाधिकार आयोग क्या है?
मानवाधिकार आयोग एक स्वतंत्र संस्था होती है, जिसका उद्देश्य लोगों के मौलिक और मानवीय अधिकारों की रक्षा करना है। भारत में National Human Rights Commission और विभिन्न राज्यों में राज्य मानवाधिकार आयोग काम करते हैं। ये संस्थाएँ मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों की जांच करती हैं और सरकार को उचित कार्रवाई के लिए सुझाव देती हैं।
राज्य मानवाधिकार आयोग की स्थापना कब हुई थी?
भारत में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए National Human Rights Commission और राज्य मानवाधिकार आयोगों की स्थापना 1993 में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत की गई थी। इस कानून के माध्यम से केंद्र और राज्यों में मानवाधिकार आयोग बनाने का प्रावधान किया गया। इसके बाद अलग-अलग राज्यों में समय-समय पर राज्य मानवाधिकार आयोग स्थापित किए गए।
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