हैदराबाद। नेशनल डिफेंस कॉलेज (National Defence College) का एक प्रतिनिधिमंडल तेलंगाना के आर्थिक और प्रशासनिक विकास मॉडल का अध्ययन करने के लिए पांच दिवसीय दौरे पर राज्य पहुंचा है। मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव ने अधिकारियों को 2014 में राज्य गठन के बाद तेलंगाना की प्रगति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक और निजी निवेश के चलते राज्य की जीएसडीपी (GSDP) और प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने वर्ष 2047 तक 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य भी साझा किया।
प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत के मामले में तेलंगाना देश में अग्रणी
विशेष मुख्य सचिव (ऊर्जा) नवीन मित्तल ने बताया कि प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत के मामले में तेलंगाना देश में अग्रणी है और राज्य ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय विस्तार किया है। प्रधान सचिव (शिक्षा) योगिता राणा ने 105 विधानसभा क्षेत्रों में आवासीय विद्यालयों की स्थापना और कौशल विकास पर जोर देने की जानकारी दी। वहीं योजना सचिव गौरव उप्पल ने बताया कि राज्य ने पिछले वर्ष 10.7 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के समेकित विकास मॉडल की सराहना की और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा भी की।
तेलंगाना का दूसरा नाम क्या है?
ऐतिहासिक रूप से तेलंगाना को “त्रिलिंग देश” (Trilinga Desha) के नाम से भी जाना जाता था। यह नाम क्षेत्र में स्थित तीन प्रमुख शिव मंदिरों—कालेश्वरम, श्रीशैलम और द्राक्षारामम—से जुड़ा माना जाता है। समय के साथ यह नाम बदलकर तेलंगाना हो गया, जो आज एक अलग राज्य के रूप में स्थापित है और अपनी विशिष्ट संस्कृति तथा पहचान के लिए जाना जाता है।
तेलंगाना राज्य का मुख्य भोजन क्या है?
खानपान के रूप में तेलंगाना का पारंपरिक भोजन चावल आधारित होता है, जिसमें दाल, सांभर, रसम और सब्जियां शामिल होती हैं। यहां के खास व्यंजनों में हैदराबादी बिरयानी, सरवा पिंडी, साकिनालु और पची पुलुसु प्रमुख हैं। मसालेदार और स्वादिष्ट भोजन इस क्षेत्र की पहचान है, जिसमें स्थानीय मसालों और पारंपरिक पकाने के तरीकों का विशेष महत्व होता है।
तेलंगाना राज्य का गठन कब हुआ था?
आधिकारिक रूप से तेलंगाना का गठन 2 जून 2014 को हुआ था। यह आंध्र प्रदेश से अलग होकर भारत का 29वां राज्य बना। लंबे समय तक चले आंदोलन के बाद यह राज्य अस्तित्व में आया, जिससे क्षेत्र के लोगों को अपनी अलग प्रशासनिक पहचान मिली।
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