ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी के डायग्नोस्टिक किट लॉन्च
हैदराबाद। आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं उद्योग मंत्री दुद्दिल्ला श्रीधर बाबू (Duddilla Sridhar Babu) ने कहा कि दवा-प्रतिरोधी क्षय रोग (टीबी) के उन्नत डायग्नोस्टिक किट निर्माण में तेलंगाना ने वैश्विक स्तर पर एक विशेष पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभरी है, क्योंकि यह सामान्य उपचारों से ठीक नहीं होती। ऐसे में समय पर पहचान और उपचार बेहद आवश्यक है। मंत्री ने मंगलवार को विधानसभा समिति कक्ष में हैदराबाद के जीनोम वैली (Genome Valley) में निर्मित ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी डायग्नोस्टिक किट का शुभारंभ किया।
भारत में टीबी नियंत्रण के प्रयासों को करेंगे मजबूत
ये किट फ्रांसीसी कंपनी बायोमेरीयू द्वारा तैयार किए जा रहे हैं, जो भारत में टीबी नियंत्रण के प्रयासों को मजबूत करेंगे। इस कार्यक्रम में बेंगलुरु स्थित फ्रांस के महावाणिज्य दूत मार्क लैमी, भारतीय फ्रांसीसी दूतावास के स्वास्थ्य सलाहकार चार्ल्स माही, तथा बायोमेरीयू के कार्यकारी अध्यक्ष अलेक्जेंडर मेरियू सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। तेलंगाना लाइफ साइंसेज के निदेशक सर्वेश सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद थे। इस अवसर पर इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने भारत-फ्रांस व्यापार संबंधों पर एक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की, जिसमें तेलंगाना के विकास में फ्रांसीसी कंपनियों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया गया।
डायग्नोस्टिक किट क्या होते हैं?
चिकित्सा क्षेत्र में उपयोग होने वाले विशेष उपकरण और रसायनों के सेट को डायग्नोस्टिक किट कहा जाता है, जिनकी मदद से शरीर में किसी बीमारी, संक्रमण या स्वास्थ्य स्थिति का पता लगाया जाता है। इन किटों का उपयोग खून, पेशाब, लार या अन्य नमूनों की जांच के लिए किया जाता है। इनके माध्यम से जल्दी और सटीक परिणाम मिलते हैं, जिससे डॉक्टर सही इलाज तय कर पाते हैं।
डायग्नोस्टिक टेस्ट कितने का होता है?
कीमत अलग-अलग प्रकार के परीक्षण पर निर्भर करती है, क्योंकि हर जांच का तरीका और उद्देश्य अलग होता है। सामान्य खून या शुगर टेस्ट ₹100 से ₹500 तक हो सकते हैं, जबकि एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड ₹500 से ₹2000 तक और सीटी स्कैन या एमआरआई जैसे उन्नत परीक्षण ₹2000 से ₹10000 या उससे अधिक तक जा सकते हैं। स्थान, अस्पताल और तकनीक के अनुसार खर्च बदलता रहता है।
डायग्नोस्टिक टेस्ट से क्या पता चलता है?
जांच के माध्यम से शरीर के अंदर चल रही स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी मिलती है, जैसे किसी बीमारी, संक्रमण, अंगों के कार्य या हार्मोन के स्तर का पता चलता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि शरीर में कोई समस्या है या नहीं और यदि है तो उसकी गंभीरता क्या है। इसी आधार पर डॉक्टर सही उपचार, दवा या आगे की जांच की सलाह देते हैं।
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