तिरुमला। तिरुमला स्थित श्रीवारी मंदिर में सोमवार को धार्मिक उत्साह (Religious Fervor) और भव्यता के साथ भाष्यकारला उत्सव की शुरुआत हुई। यह उत्सव 19 दिनों तक मनाया जाएगा और श्री भाष्यकारला सत्तुमोरा 22 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा। भगवान रामानुजाचार्य ने मीमांसा ग्रंथ पर आधारित ”श्रीभाष्यम” की रचना विशिष्टाद्वैत सिद्धांत के आधार पर की थी, जिसके कारण उन्हें ‘भाष्यकार’ कहा जाता है। यह सत्तुमोरा हर वर्ष श्रीवारी मंदिर में अरुद्र नक्षत्र के दौरान, श्री रामानुजाचार्य के जन्म दिवस के अवसर पर मनाया जाता है। उत्सव के पहले दिन सोमवार सुबह श्रीवारी मंदिर में पहली घंटी के बाद श्री रामानुज की शोभायात्रा स्वर्ण तिरुचि पर मंदिर (Temple) के चार माडा गलियों में निकाली गई। इस अवसर पर जियार स्वामी ने दिव्य प्रबंध गोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम में तिरुमला के पेड्डा जियार स्वामी, छिन्ना जियार स्वामी तथा मंदिर के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
तिरूमला पर्वत कहाँ स्थित है?
पर्वत आंध्र प्रदेश राज्य के चित्तूर जिले में स्थित है। यह पर्वत श्रृंखला पूर्वी घाट का हिस्सा है और यहीं प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर स्थित है। यह स्थान हिंदुओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के कारण यह क्षेत्र विशेष पहचान रखता है।
तिरुपति से तिरुमाला कितनी दूर है?
तिरुमला की दूरी लगभग 20 से 22 किलोमीटर है। यह रास्ता घुमावदार पहाड़ी मार्ग से होकर जाता है। श्रद्धालु बस, टैक्सी या निजी वाहन से तिरुमला पहुंच सकते हैं। इसके अलावा, कई लोग पैदल मार्ग (अलिपिरी और श्रीवारी मेट्टू) से भी यात्रा करते हैं, जो धार्मिक दृष्टि से बहुत पुण्यकारी मानी जाती है।
तिरुमला तिरुपती देवस्थानम क्या है?
तिरुपति देवस्थानम एक धार्मिक ट्रस्ट है, जो तिरुमला के श्री वेंकटेश्वर मंदिर और उससे जुड़े अन्य मंदिरों का प्रबंधन करता है। यह संस्था श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था, प्रसाद वितरण, आवास और अन्य सुविधाओं का संचालन करती है। यह दुनिया के सबसे समृद्ध और व्यस्त मंदिर ट्रस्टों में से एक माना जाता है।
तिरुपति बालाजी मंदिर कब जाना चाहिए?
बालाजी मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय सितंबर से मार्च के बीच माना जाता है, जब मौसम सुहावना रहता है। ब्रह्मोत्सव जैसे त्योहारों के दौरान यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं, लेकिन भीड़ बहुत ज्यादा होती है। सामान्य दिनों में सप्ताह के मध्य (मंगलवार से गुरुवार) कम भीड़ रहती है, जिससे दर्शन आसानी से हो सकते हैं।
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