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Quality : सरकार ने शिक्षण गुणवत्ता बढ़ाने के निर्देश दिए

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: January 28, 2026 • 10:16 PM
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सीएस ने उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की

हैदराबाद। राज्य सरकार के मुख्य सचिव के. रामकृष्णाराव (K. Ramakrishna Rao) ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षण गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए विशेष कदम उठाए जाएँ। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान में उच्च स्तरीय शिक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए और इसके लिए समग्र कार्ययोजना तैयार की जाए। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, बुधवार को डॉ. बी.आर. अंबेडकर राज्य सचिवालय (Dr. B.R. Ambedkar State Secretariat) में संबंधित उच्च अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विद्यालय शिक्षा, उच्च शिक्षा, डिजिटल शिक्षा, इंटरमीडिएट और डिग्री कॉलेजों के प्रदर्शन, यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेसिडेंशियल स्कूलों के निर्माण और अन्य पहलुओं पर चर्चा हुई।

विद्यार्थियों के लिए नियमित संवादात्मक कार्यक्रम आयोजित

मुख्य सचिव ने सुझाव दिया कि अनुभवी प्रोफेसर, लेक्चरर और शिक्षक विद्यार्थियों के लिए नियमित संवादात्मक कार्यक्रम आयोजित करें। इससे विद्यार्थियों में सृजनात्मकता, प्रेरणा और सकारात्मक सोच का विकास होगा और उनके भविष्य की योजना बनाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि केजीबीवी और अन्य वेलफेयर हॉस्टल्स में एक हॉस्टल को चुना जाए और वहाँ सोलर मॉडल किचन, स्टोरेज रूम, पेयजल, शौचालय, बिजली, इंटरनेट जैसी सभी बुनियादी सुविधाएँ स्थापित करके इसे मॉडल हॉस्टल बनाया जाए। इसे भविष्य में अन्य हॉस्टलों के लिए आदर्श माना जाएगा।

कक्षाएं चलाने का भी दिया सुझाव

मुख्य सचिव ने कॉलेज स्तर पर कैरियर गाइडेंस क्लासेस आयोजित करने, बीएड कोर्स करने वाले छात्रों को इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत सरकारी स्कूलों में शिक्षण का अनुभव देने और अनुभवी रिटायर्ड शिक्षकों तथा मेंटर्स के मार्गदर्शन में कक्षाएं चलाने का भी सुझाव दिया। बैठक में विद्या विभाग की मुख्य सचिव योगिता राणा, उच्च शिक्षा विभाग के कमिश्नर श्रीदेवसेन, इंटरमीडिएट बोर्ड के सचिव कृष्ण आदित्य, आईटी विशेष सचिव भवेश मिश्रा, स्कूल शिक्षा संचालक नवीन निकोलस सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

शिक्षण का क्या अर्थ है?

ज्ञान, कौशल और मूल्यों को विद्यार्थियों तक पहुँचाने की प्रक्रिया को कहते हैं। इसमें पढ़ाई, प्रशिक्षण, अनुभव और मार्गदर्शन शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य व्यक्ति के व्यक्तित्व, सोच और जीवन कौशल को विकसित करना है।

शिक्षण का जनक कौन था?

भारत में महर्षि वात्स्यायन और तक्षशिला विश्वविद्यालय के विद्वानों को प्राचीन काल में शिक्षण के संस्थापक माना जाता है। आधुनिक शिक्षा प्रणाली में जॉन कॉमेनियस को “शिक्षण का जनक” कहा जाता है।

शिक्षण के कितने प्रकार होते हैं?

मुख्यतः तीन प्रकार माने जाते हैं: औपचारिक शिक्षण (विद्यालय/कॉलेज), गैर-औपचारिक शिक्षण (कार्यशाला/सेमिनार), और अनौपचारिक शिक्षण (घर, अनुभव या जीवन से सीखना)। इनसे ज्ञान का समग्र विकास होता है।

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